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अधिकारियों को छोड़नी होगी चलता रहेगा की मानसिकता : राष्ट्रपति

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से ऐसा चलता ही रहेगा की मनोवत्ति से निजात पाने का आहवान करते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा कि देश को ऐसे पेशेवर अधिकारियों की जरूरत है जो नये तरीके अपना कर व्यवस्था को नागरिकों की जरूरतों के प्रति जिम्मेदार बना सकें।

राष्ट्रपति ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह का उदाटन करते हुए कहा कि ऐसा ही चलता रहेगा वाली मनोवत्ति को बदलना होगा। हमें ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो व्यवस्था के दायरे में नये -नये तरीके ढूंढ़े ताकि व्यवस्था देशवासियों की आवश्यकताओं के प्रति जिम्मेदार बने।

 भ्रष्टाचार पर चोट करते हुए उन्होंने कहा कि यह भी महसूस किया जा रहा है कि व्यवस्था में धन का अपव्यय हो रहा है और यह पूरी तरह और सही लाभार्थी तक नहीं पहुंच पा रहा है।

प्रशासन को जनोन्मुख होने की नसीहत देते हुए प्रतिभा ने कहा कि प्रशासन को जनता के निकट ले जाने और जनता के बीच की दूरी को समाप्त करने के प्रयास किये जाने चाहिए और यदि शिकायतें हों तो उनको दूर करने के लिए एक तीव्र तंत्र होना चाहिए।

राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि आपको न केवल अपने कार्य के प्रति ईमानदार बनना है बल्कि अपने कर्मचारियों को भी ईमानदार बनने के लिए प्रेरित करना है। भ्रष्टाचार एक कैंसर की तरह है और आपको उसे प्रशासनिक तंत्र से मिटाना है।

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