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दो टूक

रेलवे परियोजनाओं की रेल ने अब बिहार की बजय पश्चिम बंगाल का रुख कर लिया है। एक मौके को छोड़कर पिछले न जाने कितने रेल बजट में परियोजनाएं बिहार ही जाती रही हैं। इसलिए आप ममता बनर्जी को ज्यादा दोष नहीं दे सकते। वैसे औद्योगिक रूप से पिछड़े बिहार के नेताओं ने अपने राज्य का ध्यान रखा तो इसमें क्या बुराई?

रेलवे किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है तो वह किसी राज्य की संपत्ति भी नहीं है। व्यवस्था ऐसी बननी चाहिए कि परियोजनाएं मंत्री के गृहराज्य में जाने की बजय वहां जाएं जहां उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है। किसी प्रदेश का भला सिर्फ रेल परियोजनाओं से नहीं होने वाला। भला तभी होगा जब हर तरह के उद्योगों के पहुंचने का रास्ता बनेगा।

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