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बॉडी मास इंडेक्स

हाल ही में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर ने भारतीयों के लिए मोटापे की नई गाइडलाइंस जारी की हैं। बॉडी मास इंडेक्स की इस विधि के अंतर्गत व्यक्ति की ऊंचाई और वजन का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है, हालांकि इसके द्वारा शरीर में मौजूद फैट की गणना नहीं की जाती, बल्कि स्वस्थ शरीर के लिहाज से कितना बॉडी फैट जरूरी है, इसकी गणना की जाती है। चूंकि मापन और गणना के लिहाज से यह काफी आसान विधि है, इसलिए इसका प्रयोग वजन से जुड़ी तकलीफों को पहचानने के लिए किया जाता है।

इस इंडेक्स की खोज 1830 और 1850 के बीच बेल्जियम के एडोल्फ क्वीटलेट ने की थी। बॉडी मास इंडेक्स की गणना करने के लिए किसी व्यक्ति के शरीर के वजन को उसकी ऊंचाई के वर्ग से भाग दे दिया जाता है। 1950-60 के दौरान पश्चिमी देशों में जब मोटापे की समस्या ने विकराल रूप ले लिया, तब बॉडी मास इंडेक्स का इस्तेमाल लोगों के बीच तेजी से प्रचलन में आया था।

बीएमआई का आकलन बीएमआई चार्ट के द्वारा भी किया जाता है। चार्ट में बॉडी मास इंडेक्स की अलग-अलग वैल्यू को कंटूर लाइनों के द्वारा दर्शाया जाता है और इसकी श्रेणियों को विभिन्न रंगों द्वारा दिखाया जाता है। पहले भारत में ब्रिटिश और अमेरिकन पैमाने के मुताबिक ही बॉडी मास इंडेक्स का आकलन किया जाता था, लेकिन नई गाइडलाइंस के तय हो जाने के बाद से मोटापे का आकलन करना आसान हो जाएगा।

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  • Web Title:बॉडी मास इंडेक्स