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लाभकारी भुट्टा

उद्योगों में मकई के भरपूर इस्तेमाल और इसकी फूड वैल्यू के कारण यह विश्व की महत्वपूर्ण फसलों में से एक है। विश्व में गेहूं के बाद सबसे ज्यादा प्रोडक्शन मकई का ही होता है। ऐतिहासिक समीक्षा में ये बात सामने आई है कि मक्के का उत्पादन की शुरुआत मैक्सिको में वहां के मूल निवासियों द्वारा दस हजार वर्ष पूर्व की गई थी। भुट्टे को गरीबों का भोज्य पदार्थ भी कहा जाता है। इसमें कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं।

कॉर्नेल विश्वविद्यालय में किए गए एक शोध में खुलासा हुआ है कि भुट्टे के सेवन से हृदय रोगों और कैंसर की संभावना कम हो जाती है। भुट्टे में एंटी ऑक्सीडेंट की अधिकता तो होती है, साथ ही इसके दानों को पकाने से फूलिक एसिड मिलता है जो शरीर की कैंसर से लड़ने की क्षमता को मजबूत करता है। फ्रूलिक एसिड मुख्यत: अनाजों में पाया जाता है और मक्के में इसकी काफी ज्यादा मात्रा मौजूद होती है। मक्के में कैरोटीन की मौजूदगी के कारण यह पीला होता है। भुट्टे में बीटा-कैरोटीन की कम मात्रा होती है।

भुट्टे के गुण
- मक्के में काबरेहाइड्रेट की अधिकता होती है। इसके अलावा, इसमें खनिज और विटामिन जैसे पोटेशियम, फॉसफोरस, आयरन और थायमीन भी होता है।

- कॉर्न ऑयल कोलेस्ट्रॉल कम करने में मददगार होता है। इसलिए हृदय रोगों में ये काफी लाभकारी होता है। कॉर्न ऑयल में पॉली अंसतृप्त फैटी एसिड (55%), मोनो अंसतृप्त फैटी एसिड(32%) होते हैं।

- मक्के में ग्लाइकेमिक इंडेक्स (ब्लड शुगर बढ़ाने की क्षमता वाला तत्व) की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए डायबिटीज के रोगियों को इसे संतुलित मात्रा में ही खाना चाहिए।

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