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पाकिस्तान के परमाणु हथियार सबसे बड़ा खतरा

पाकिस्तान के परमाणु हथियार सबसे बड़ा खतरा

पाकिस्तान के परमाणु संयंत्रों में काम करने वाले लोगों का परमाणु बम हासिल करने की इच्छा रखने वाले आतंकवादियों के साथ मिलकर काम करने का खतरा अब पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।

अमेरिका की सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी (सीआईए) में 23 वर्ष काम कर चुके रॉल्फ मोवाट-लार्सन ने हथियार नियंत्रण एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘‘आर्म्स कंट्रोल टुडे’’ के जुलाई/अगस्त अंक में कहा है कि आंतरिक खतरों से निपटने में पाकिस्तानी अधिकारियों का रिकार्ड काफी निराशाजनक रहा है।

उदाहरण के रूप में उन्होंने पाकिस्तानी तंत्र की नाक के नीचे परमाणु बम के जनक अब्दुल कादिर खान द्वारा ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को संवेदनशील परमाणु जानकारी देने के लिए स्थापित किए गए नेटवर्क का हवाला दिया।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिकों द्वारा स्थापित संस्था ‘‘उम्मा-तामीर-ए-नयु’’ (यूटीएन) का अल कायदा और तालिबान के साथ निकट संपर्क है। इसके मुखिया सुल्तान बशीरुद्दीन महमूद पाकिस्तान के खुशाब परमाणु संयंत्र के प्रमुख रह चुके हैं।

मोवाट-लार्सन ने लिखा है कि महमूद ने अल कायदा की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर ओसामा बिन लादेन के साथ चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि लादेन ने महमूद से पूछा था कि यदि संगठन सामग्री पहले से उपलब्ध हो, तो वह किस तरह से बम बना सकते हैं।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी परमाणु हथियार कार्यक्रम के दो संस्थापकों द्वारा संवेदनशील सूचनाओं को बेचने के स्वतंत्र प्रयास हतप्रभ कर देने वाले हैं।

मोवाट-लार्सन ने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवादियों, कट्टरपंथियों और परमाणु हथियार संस्थानों के भीतर काम करने वालों के बीच घातक निकटता है।

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