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आंध्रप्रदेशः महिला गृहमंत्री की चुनौतियां

सविता इंद्र रेड्डी पर भारतीय महिलाओं को गर्व होना चाहिए, वे किसी भी राज्य की पहली महिला गृहमंत्री बनी हैं। पिछले महीने जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई. एस. चंद्रशेखर रेड्डी ने उन्हें यह पद सौंपा तो लगातार तीन बार विधायक रहीं सविता चर्चा में आ गईं।

उन्हें यह जिम्मा सौंपे जाने से भारतीय महिलाओं और खासकर प्रदेश की महिलाओं में एक उम्मीद जगी है, उस समय जब औरतों के खिलाफ होने वाले अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि उनकी नियुक्ति को लेकर विवाद भी खड़ा हुआ है, यह भी कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने अपनी ‘मुंहबोली बहन’ को यह पद इसलिए सौंपा है ताकि वे खुद उनके नाम पर मंत्रालय चला सकें। शक का एक कारण यह भी है कि मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था का विभाग अपने पास रखा है और उसे गृहमंत्री को नहीं सौंपा।

तीन बेटों की मां सविता रेड्डी को राजनीति में इसलिए आना पड़ा, क्योंकि उनके पति एन. टी. रामराव की तेलुगू देशम सरकार में गृहमंत्री पी. इंद्र रेड्डी का निधन हो गया था। इसके पहले वे तेलुगू देशम के लक्ष्मी पार्वती धड़े से होते हुए कांग्रेस में चले गए थे। सविता रेड्डी का कहना है कि एक समय था, जब उन्हें माइक पर बोलने तक से डर लगता था। मुख्यमंत्री उन्हें चेल्लेम्मा यानी छोटी बहन कहते हैं।

गृहमंत्री का पद संभालते ही सविता को जिस पहले विवादस्पद मसलों से निपटना पड़ रहा है, वे महिलाओं से जुड़े हुए ही हैं। चाहे वह रामराव का मसला हो या फिर वी. चामुंडेश्वरनाथ का मामला हो। रामाराव तेलुगू देशम के विधायक हैं और चामुंडेश्वरनाथ या चामुंडी आंध्र क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव हैं। रामराव दलित विधायक हैं और यह भी कहा जा रहा है कि सरकार उनका इस्तेमाल क्रिकेट विवाद को दबाने के लिए कर रही है।

क्रिकेट विवाद उस समय सामने आया था, जब प्रदेश की महिला क्रिकेट टीम की कई सदस्यों ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। चामुंडी को इंग्लैंड में बीस ओवरों के विश्व कप के लिए भारतीय टीम का प्रशासनिक मैनेजर बनाया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने महिला खिलाड़ियों को अश्लील एसएमएस भेजे और उनसे यौन संबंध बनाने चाहे। इसकी खबरें जब स्थानीय अखबारों में पहले पेज पर छपी तो काफी हंगामा हुआ। महिला खिलाड़ियों का एक प्रतिनिधिमंडल गृहमंत्री सविता से भी मिला। आंध्र क्रिकेट एसोसिएशन ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया, हालांकि एक मांग यह भी थी कि चामुंडी के खिलाफ वित्तीय घोटाले की पहले से चल रही जांच जब तक पूरी नहीं हो जाती, उन्हें पद से हटा दिया जाए। लेकिन एसोसिएशन ने 26 जुलाई की बैठक तक के लिए सब कुछ टाल दिया।

सरकार को पता था कि यह विवाद गहराएगा, इसलिए उसने रामाराव प्रकरण को हवा दी। पहली बार विधायक बने रामाराव का निदादिवोले में एक नर्सिंग कॉलेज है।

रामाराव जब वहां चल रही एडमिशन प्रक्रिया के दौरान एक दिन देर रात को वापस आ रहे थे तो स्थानीय लोगों की भीड़ ने उन पर हल्ला बोल दिया। लोगों का आरोप था कि कॉलेज की एक छात्रा का बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी।

बलात्कार और हत्या की यह खबर एक स्थानीय अखबार साक्षी में छपी थी। यह अखबार मुख्यमंत्री के परिवार का ही है। खबर छपने के बाद महिला संगठनों ने कड़ी सजा देने की मांग की। सरकार ने मामले की सीआईडी जांच की घोषणा भी कर दी। उधर तेलुगू देशम ने इस मामले में चुप्पी साध ली।

उधर जांच में पता पड़ा कि कॉलेज की कोई छात्रा गायब नहीं हुई थी और दीवार पर पड़े जिन लाल धब्बों को खून के निशान बताया गया था, वे रेड आक्साइड के निकले। जांच के नतीजे आए तो तेलुगूदेशम भी अपने विधायक के बचाव में कूद पड़ी। रामाराव का कहना था कि उन्हें दलित होने के कारण निशाना बनाया जा रहा है।

इस बीच गृहमंत्री और मुख्यमंत्री यही कहते रहे कि धुंआ है तो कहीं तो आग रही ही होगी। यह एक ऐसा मामला बन गया, जिसमें न तो कोई पीड़ित सामने आया और न ही किसी तरह की एफआईआर ही की गई, लेकिन सीआईडी जांच जरूर हो गई। फिलहाल रामाराव अपनी पत्नी और बच्चों के साथ भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।

लेकिन देश की पहली महिला गृहमंत्री इस मामले में पार्टी लाइन पर ही चल रही हैं। लेकिन अगर वे सचमुच इस पद पर महिलाओं के प्रतिनिधि के रूप में रहना चाहती हैं तो उन्हें यह देखना होगा कि बलात्कार और हत्या की खबर कहां से शुरू हुई। दीवार पर खून के धब्बे रेड आक्साइड के कैसे निकले। और मामले को हवा कैसे दी गई।

radhaviswanath73@yahoo.com
लेखिका वरिष्ठ पत्रकार हैं

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