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मूर्तिकांड का असर स्टाम्प डयूटी पर भी

मूर्तियों और स्मारकों को स्थापित करने के मामले में मुख्यमंत्री मायावती के फंसने से सरकार स्टाम्प डच्यूटी जैसे अहम मामलों में अभी तक कोई निर्णय नहीं ले सकी है। इस कारण पिछले दो दिनों से रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी है। इससे जिला राजस्व विभाग को लाखों-करोड़ों का चूना लग रहा है।


शासन द्वारा जारी की गई12 जून की एक अधिसूचना के मुताबिक विकास प्राधिकरणों मसलन जीडीए,यूपी आवास विकास परिषद्,यूपीएसआईडीसी की आवंटित धनराशि पर स्टाम्प डच्यूटी में छूट की समय सीमा अगले 6 महीने के लिए बढ़ा दी गई। लेकिन छूट किस हिसाब से मिलेगी,इस बारे में शासन ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। शासन स्तर पर 30 जून तक इस बारे में अहम निर्णय लिए जाने थे। बताया जाता है कि मूर्तियों और स्मारकों को स्थापित करने के मामले में मुख्यमंत्री के फंसने से सरकार को इस बारे में सोचने की भी फुर्सत नहीं है। दूसरी ओर राजस्व नुकसान होते देख विकास प्राधिकरण और स्टाम्प विभाग के अधिकारी इस बात को लेकर भारी उलझन में है कि आवंटियों से पुराने रेट पर स्टाम्प लिया जाएगा अथवा संशोधित दर पर। यहां तक कि वृहस्पतिवार को प्रमुख सचिव(स्टाम्प) देश दीपक वर्मा पूरे दिन गाजियाबाद रहें, लेकिन इस मामले में उन्होंने मुंह तक नहीं खोला। इस कारण स्टाम्प डच्यूटी में छुट की दर पहले की तरह की लागू रहेगी अथवा बंद, लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। पूर्व में जारी एक अधिसूचना में डीएम सर्किल रेट और विकास प्राधिकरणों की आवंटित धनराशि पर सर्किल रेट में 2-2 फीसदी की छूट दी गई थी। इससे महिलाओं को 6 की जगह 4 फीसदी और पुरुषों को 7 की जगह 5 फीसदी पर रजिस्ट्री कराने की छूट मिली। लेकिन यह सीमा 29 जून समाप्त हो गई।
अमरेश कुमार तिवारी

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