class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मौत के बाद दर्ज हुई घूस मांगने की प्राथमिकी

पीडब्ल्यूडी के कार्यपालक अभियंता योगेन्द्र पांडे प्रकरण में शक के दायरे में आए ठेकेदार किशोर कुमार सिंह ने अपने बचाव में नए हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए हैं। उसने कार्यपालक अभियंता पर दो लाख रुपये घूस मांगने और मारपीट करने के आरोप लगाए हैं।

9 जून को अस्पताल में किशोर के दिए फर्दबयान के आधार पर 27 जून को यह प्राथमिकी भी उसी डुमरा थाने में दर्ज हुई। जिस थाने में योगेन्द्र की मौत से संबंधित ओडी केस दर्ज है। सबसे चौकाने वाली बात तो यह है कि इस मामले का शिकायतकर्ता मेसर्स वत्स कंस्ट्रक्शन का प्रोपराईटर किशोर कुमार सिंह है। इस प्रोपराईटर पर योगेन्द्र ने घटना के दिन ही बिल भुगतान के लिए मारपीट और जान से मारने की धमकी की प्राथमिकी (198/09) दर्ज करायी थी। तब उसे पुलिस ने उसी दिन गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।


बताया जाता है जमानत पर रिहा होने के बाद किशोर उसी दिन सीतामढ़ी सदर अस्पताल में दाखिल हो गया। वहां उसका इलाज किया गया। 9 जून को अस्पताल में ही किशोर ने पुलिस को यह फर्दबयान दिया था कि जब वह 6 जून को कार्यपालक अभियंता के कार्यालय में सीतामढ़ी-ढेंगा पथ में कराए गए कार्य के बिल भुगतान की मांग को लेकर कार्यपालक अभियंता योगेन्द्र पाण्डेय के कार्यालय में पहुंचा तो उन्होंने उससे दो लाख रुपये घूस मांगे। इसी बात को लेकर दोनों में कहासुनी हो गई। इसके बाद योगेन्द्र, कार्यालय का कम्प्यूटर ऑपरेटर बसंत कुमार व अनुसेवी नरेश दास और प्रेमनाथ सिंह सहित वहां मौजूद तीन-चार अज्ञात लोगों ने उसे पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई की। इससे वह बुरी तरह घायल हो गया। इस दौरान बसंत कुमार ने उसके पाकेट से 25 हजर रुपये निकाल लिए।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:मौत के बाद दर्ज हुई घूस मांगने की प्राथमिकी