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सिर्फ साइन बोर्ड पर ही चल रहे हैं बाल श्रमिक विद्यालय

 पूर्वी चंपारण में सिर्फ साइन बोर्ड पर ही चल रहे है बाल श्रमिक विद्यालय। घपला हो रहा है। विधान परिषद में गुरुवार को सतीश कुमार ने यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि बाल श्रम आयोग के उपाध्यक्ष के साथ वे स्वयं मोतिहारी, बैरिया, चौरण गए थे यह देखने की वहां बाल श्रमिक विद्यालय चल रहे हैं कि नहीं। बच्चों और उनके माता-पिता ने बताया कि मास्टर यह कहकर चले जाते हैं कि कोई आएगा तो यह कह देना की आज सर बीमार हैं इसलिए नहीं आए हैं।

इस पर महाचंद्र प्रसाद सिंह भी खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि सदस्य ने फिजिकल वेरीफिकेशन किया है और स्कूल को फर्जी पाया गया। ऐसे में कार्रवाई होनी चाहिए। सदस्यों के शोर-शराबे पर श्रम संसाधन मंत्री अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि वे डेपुटी लेबर कमिश्नर से इसकी जांच कराएंगे। इस बीच उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बाल श्रमिक आयोग के उपाध्यक्ष ने जब वहां का निरीक्षण कर रिपोर्ट दी है तो फिर उसपर भी कार्रवाई की जा सकती है। इसके पहले मंत्री ने कहा कि राज्य के 24 जिले बाल श्रमिक परियोजना से आच्छादित हैं। इनमें से 23 जिलों में विशेष विद्यालय का संचालन किया जा रहा है।

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