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देश में 28 हजार स्वास्थ्य केंद्रों की कमी है

 देश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार तो हुआ है लेकिन अब भी 28 000 स्वास्थ्य केंद्रों की अब भी कमी है। संसद में गुरुवार को पेश 2008.09 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पहले की तुलना में सुधार तो हुआ है लेकिन इसके बावजूद अब भी 20 855 उप केंद्रों, 4 833 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा 2525 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी क्षेत्र के 34 प्रतिशत स्वास्थ्य केंद्र किराए के ढांचों में चलाए जा रहे हैं वहां न तो रखरखाव ठीक है और न ही वहां डॉक्टरों और अर्ध चिकित्सा बलों की उपस्थिति ही संतोषजनक है।


 समीक्षा के अनुसार देश में फिलहाल 171687 स्वास्थ्य केंद्र तथा 33855 डिसपेंसरियां एवं अस्पताल और जबकि 15 लाख नर्से हैं। इसके अलावा आधुनिक चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टरों की संख्या 84852 हैं। समीक्षा में उम्मीद जताई गई है कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी इसके लिए छह लाख 49 हजार स्वास्थ्य कर्मियों का चयन किया गया है। जिनमें से 5 लाख 63 हजार को प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को 24 घंटे संचालित करने की योजना है। कुल 22379 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में से 31 मार्च 2005 तक मात्र 1263 केंद्र ही 24 घंटे संचालित किए जा रहे थे।


स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियां गिनाते हुए समीक्षा में कहा गया है पिछले तीन वर्ष में जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत 15करोड़ 90 लाख महिलाओं को संतान उत्पत्ति के लिए स्वास्थ्य केंद्रों तक लाया जा सका। भारतीय जन स्वास्थ्य मानक तय किए जा चुके हैं। देश के सभी जिला अस्पतालों को मूलभूत सेवाओं में सुधार लाने के लिए 20.20 लाख रूपए की पहली किश्त दी जा चुकी है। इसके अलावा राज्यों में फिलहाल 243 सचल चिकित्सा इकाइयां भी मौजूद हैं। एड्स नियंत्रण का जिक्र करते हुए सर्वेक्षण में कहा गया है कि फिलहाल देश में 217000 से अधिक एचआईवी पॉजिटिव लोगों का एन्टी रेट्रो वायरल उपचार किया जा रहा है।

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