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निड और निफ्ट में बना रहे हैं अंगप्रदेश की लोक चित्रकला को आधार

निड और निफ्ट में बना रहे हैं अंगप्रदेश की लोक चित्रकला को आधार

भागलपुर की लोक चित्रकला मंजूषा नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) और नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) तक पहुंच गई है। दिल्ली, अहमदाबाद, कोलकाता, बंगलूरु में फैशन व डिजाइन के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ रहे भागलपुर के छात्रों ने वहां मंजूषा की एक प्रदर्शनी लगाई थी। विशेषज्ञों ने इसे देखा और इस लोककला के महत्व को स्वीकारा।

यहां के छात्रों ने मंजूषा को राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए फैशन व डिजाइन की दुनिया के नामचीन डिजाइनरों और विशेषज्ञों से भी बात की। अब उनके ही निर्देश पर पिछले एक सप्ताह से छात्रों की यह टीम भागलपुर में मंजूषा को जानने-समझने के लिए अध्ययन व शोध कार्य में जुटी है।

वैसे तो भागलपुर के दर्जनों छात्र इस काम में लगे हुए हैं लेकिन मुख्य रूप से इनमें तीन छात्र साकेत, अंकिता और सन्नी है। अंकिता के प्रोजेक्ट का आधार मंजूषा है। लालबाग, प्रोफेसर कॉलोनी में रह रहे भागलपुर विश्वविद्यालय पीजी अर्थशास्त्र के रीडर डा. उपेन्द्र साह की बेटी अंकिता देश के सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) अहमदाबाद की द्वितीय वर्ष की छात्रा है। अंकिता इस वक्त मंजूषा को ग्राफिक रूप में तैयार कर रही है। इसके लिए मंजूषा से जुड़ी कहानी को ग्राफिक्स और कॉमिक्स में उतारने की कोशिश है।

यह इस प्रक्रिया का पहला चरण है। हालांकि मांग के अनुरूप इसमें मंजूषा के मूल रंगों में थोड़ी तब्दीली दिखेगी लेकिन अंकिता का मानना है कि इससे मंजूषा को नई पहचान मिलेगी। फैशन की दुनिया भी इस लोककला के बारे में जान-समझ सकेगी। इसी सिलसिले में पिछले दिनों अंकिता यहां आई थी। आज फैशन में नए प्रयोगों के दौर में यह बड़ा काम है।

साकेत का मानना है अंगप्रदेश की लोक चित्रकला मंजूषा में अपार संभावनाएं हैं। इसलिए साकेत ने भी अपने रिसर्च प्रोजेक्ट का आधार मंजूषा को बनाया है। इसी सिलसिले में इन दिनों भागलपुर आए हुए हैं। मशाकचक निवासी अभियंता ओमप्रकाश मंडल के पुत्र साकेत निफ्ट दिल्ली में निटवेयर कोर्स के चतुर्थ वर्ष के छात्र हैं।

वे अभी ग्लोबल इशू इन डिजाइन के तहत मंजूषा पर काम कर रहे हैं। इनका मानना है कि मंजूषा लुप्तप्राय कला है इसलिए इसे रोजगार के साथ जोड़कर ही जिंदा रखा जा सकता है। इसीलिए मंजूषा को फैशन की दुनिया में लाना चाहते हैं। साकेत को इसकी प्रेरणा मूल जमालपुर (मुंगेर) के नामचीन डिजाइनर सामंत चौहान से मिली जो भागलपुरी तस्सर का प्रयोग कई फैशन शो में कर चुके हैं।

इशाकचक के सन्नी, गोराडीह के मुकेश भी दिल्ली में फैशन डिजइन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। इनलोगों ने भी मंजूषा कला को अपने काम का आधार बनाया है। इन छात्रों की लगन व प्रतिभा से वहां के नामचीन डिजाइनर भी हतप्रभ है।

शहर के कलाप्रेमियों को भी उनसे काफी उम्मीद है। यहां के कलाप्रेमियों का मानना है कि इस पहल से मंजूषा की राष्ट्रीय फलक पर एक अलग पहचान बनेगी और मधुबनी पेटिंग की तरह ही इसका भी विस्तार होगा।       

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  • Web Title:राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान तक पहुंची मंजूषा कला