class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आर्थिक वृद्धि दर 7.5 फीसदी तक रहेगी

आर्थिक सर्वेक्षण में चालू वित्त वर्ष के दौरान देश की आर्थिक वद्धि दर 7.5 फीसद रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है, हालांकि यह तभी संभव हो सकेगा जब सितंबर तक अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी से उबरनी शुरू हो जाए और मानसून मेहरबान रहे।


गुरुवार में संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है, अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था सितंबर, 2009 तक संकट से उबर जाए और मानसून सामान्य रहे तो चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 2008-09 का निष्पादन दोहरा सकती है। हालांकि चालू वित्त वर्ष में वृद्धि का ढांचा बीते वित्त वर्ष के समान रहने की संभावना नहीं है। 2008-09 की तरह इस बार पहली दो तिमाहियों में वृद्धि दर काफी उंची नहीं रह सकती, लेकिन आखिरी दो तिमाहियों में वद्धि दर बढ़ सकती है।

बीते वित्त वर्ष में प्रथम दो तिमाहियों में देश की आर्थिक वद्धि दर 7.5 फीसद से अधिक रही, लेकिन अमेरिकी फर्म लेहमैन ब्रदर्स के ढहने के साथ घरेलू आर्थिक वृद्धि दर डगमगा गई। इससे अंतिम दो तिमाहियों में अर्थव्यवस्था महज 5.8 फीसद वृद्धि दर्ज कर सकी।


बीते वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.7 फीसदी रही जो इससे पूर्व पांच वर्षों की औसत आर्थिक वृद्धि दर 8.8 फीसदी के मुकाबले 2.1 फीसदी कम है। भारत की आर्थिक वद्धि दर के लिए विभिन्न विश्लेषक संस्थानों, रिजर्व बैंक और बहुपक्षीय एजेन्सियों ने कई अनुमान जताए। आईसीआरआईईआर ने 4.8 फीसदी, जबकि इक्रा ने 7.5 फीसद की आर्थिक वद्धि दर का अनुमान जताया। वहीं, रिजर्व बैंक ने छह फीसदी की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान व्यक्त किया। वहीं प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने आर्थिक वृद्धि दर 7-7.5 फीसदी रहने की उम्मीद जाहिर की है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:आर्थिक वृद्धि दर 7.5 फीसदी तक रहेगी