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आर्थिक समीक्षा की मुख्य बातें

आर्थिक समीक्षा की मुख्य बातें

सरकार ने गुरुवार को संसद में पेश वर्ष 2008-09 की आर्थिक समीक्षा में देश में निवेश के वातावरण में सुधार के लिए बीमा और रक्षा उत्पादन क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने तथा चीनी, खाद आदि पर मूल्य नियंत्रण खत्म करने के  संकेत दिए।

आर्थिक वृद्धि दर 2008-09 में घटकर 6.7 प्रतिशत है जो 2007-08 में 9 प्रतिशत थी।


राजकोषीय घाटा 2008-09 में बढ़कर 6 प्रतिशत से अधिक है जो 2007-08 में 2.7 प्रतिशत थी।


करों में कटौती सहित अन्य वित्तीय प्रोत्साहनों का सुझाव।


25,000 करोड़ रुपये सालाना जुटाने के लिए विनिवेश कार्यक्रम बहाल हो।


चिन्हित लाभ कमा रही गैर नवरत्न पीएसयू में 5-10 प्रतिशत इक्विटी बेचने की प्रक्रिया पूरी की जाए।


सभी गैरसूचीबद्ध पीएसयू की सूचीबद्धता तथा कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सेदारी आम निवेशकों को बेचने का सुझाव।


बहाल नहीं हो सकने वाली घाटे में चल रही सभी पीएसयू की नीलामी हो।


नये आयकर कोड की शुरुआत।


3 जी स्पेक्ट्रम की नीलामी।


नीलाम किया स्पेक्ट्रम मुक्त कारोबार योग्य हो।


स्पेक्ट्रम पर पूंजी लाभ को आयकर कानून के दायरे में रखा जाए।


अधिभारों, उपकरों तथा सौदा करों को समाप्त करने की समीक्षा हो।


पेट्रोलियम, उर्वरक तथा खाद्य सब्सिडी में सुधार हो ताकि लीकेज को कम किया जा सके।


एलपीजी सब्सिडी को एक परिवार के लिए अधिकतम 6-8 सिलेंडर प्रति वर्ष सीमित किया जाए।


हर ग्रामीण परिवार में सौर कुकर तथा सौर चिमनी की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए केरोसीन आपूर्ति सब्सिडी को समाप्त किया जाए।

सीमा शुल्क छूटों की समीक्षा हो।


अलग-अलग शुल्कों को टालने के लिए एकसमान शुल्क ढांचे की ओर बढ़ा जाये।


जीएसटी एक अप्रैल 2010 से लागू।


यूआईडी प्राधिकार का तीन माह में त्वरित परिचालन।


कृषि वृद्धि दर 2008-09 में घटकर 1.6 प्रतिशत।

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