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पर्यटन स्थल जंतर - मंतर बन गया है राष्ट्रीय धरना स्थल

राजधानी के कनाट प्लेस इलाके में स्थित ऐतिहासिक पर्यटन स्थल जंतर-मंतर अब धरना और प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिक मशहूर होता जा रहा है।

जंतर-मंतर ने देश-विदेश के पर्यटकों के बीच एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में अपनी अनूठी पहचान बनाई है लेकिन हाल के सालों में यह स्थल धरना-प्रदर्शनों के लिए अधिक जाना जाने लगा है। यह देश का एकमात्र ऐसा स्थान है,जहां कुछ लोग मौज-मस्ती और सैर सपाटा करते दिखाई देते हैं तो इससे कहीं ज्यादा संख्या में लोग अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने के लिए धरना-प्रदर्शन और रैलियां करते नजर आते हैं। हर रोज होने वाले धरना-प्रदर्शनों के कारण यह स्थान अब राष्ट्रीय धरना स्थल बन गया है। देश भर के दुखियारे भी अपनी आवाज सत्ता के गलियारों तक पहुंचाने के लिए यहां डेरा डाले रहते हैं।

अपने रिश्तेदार के यहां छुट्टियां मनाने राजधानी आए कानपुर निवासी अजय प्रताप सिंह ने कहा कि मैंने जंतर-मंतर के बारे में काफी कुछ सुना था। इसलिए मैं इसका नजारा लेने यहां आया था लेकिन मैं तब हैरान रह गया जब मैंने यहां दो घंटों के भीतर चार रैलियां देखीं।

यहां घूमने आए एक ब्रिटिश पर्यटक ने कहा कि मैं जंतर-मंतर देखने आया था लेकिन यहां पर्यटकों की तुलना में प्रदर्शनकारी ज्यादा नजर आते हैं। यह काफी चौंकाने वाला दृश्य है।

कुछ संगठन तो ऐसे हैं,जो पिछले दो-तीन साल से अपनी मांगों को लेकर यहां डेरा जमाए हुए हैं। उनके लिए यही घर है और यही कर्मभूमि। निठारी कांड और भ्रष्टाचार के खिलाफ आठ जनवरी 2007 से जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे (जूता मारो आंदोलन) के अध्यक्ष मच्छीन्द्रनाथ सूर्यवंशी ने कहा कि यह एक राष्ट्रीय धरना स्थल है। जंत- मंतर से हम अपनी आवाज राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री और सभी बडे़ नेताओं तक आसानी से पहुंचा सकते हैं।

देश के सभी राज्यों और सरकारी कार्यालयों में हिन्दी भाषा का प्रयोग अनिवार्य किए जाने की मांग को लेकर 09 अगस्त 2008 से यहां धरने पर बैठे आल इंडिया ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलमदार अब्बास ने कहा कि जंतर-मंतर ही एक ऐसा स्थल है,जहां से हम अपनी आवाज सीधे देश के नेताओं तक आसानी से पहुंचा सकते हैं।

जंतर-मंतर पर हर रोज होने वाले धरना-प्रदर्शनों के लिए पुलिस को सुरक्षा की दृष्टि से यहां कडे़ इंतजाम करने पड़ते हैं। विशेषकर संसद सत्र के दौरान तो पुलिस को जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में ज्यादा चौकसी बरतनी पडती है। संसद सत्र के दौरान तो यहां मेले जैसा माहौल होता है।

जंतर-मंतर की सुरक्षा में लगे एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यहां पर काम करना चुनौती भरा काम है। प्रदर्शनों के दौरान किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए हमें विशेष कदम उठाने पडते हैं। हमें प्रदर्शनकारियों के आक्रोश का शिकार भी होना पड़ता है। हालांकि हम प्रयास करते हैं कि किसी भी प्रदर्शनकारी को कोई चोट नहीं पहुंचे लेकिन कभी-कभार प्रदर्शनकारी अपना आपा खो बैठते हैं जिससे हमें उन्हें काबू में करने के लिए लाठी चार्ज करना पड़ता है और पानी की बौछार छोड़नी पड़ती है। अलबत्ता हम पूरा प्रयास करते हैं कि लोग शांतिपूर्वक अपनी बात संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकें।

 जंतर-मंतर पर छोले कुल्चे बेचकर अपने परिवार के लिए दो जून की रोटी जुटाने वाले उत्तर प्रदेश के निवासी हरिप्रसाद ने बताया कि मैं यहां पिछले चार साल से छोले कुल्चे बेच रहा हूं। बडी़ रैलियों के दौरान मेरी अच्छी खासी कमाई हो जाती है। जंतर-मंतर के आसपास स्थित कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यह धरना स्थल परेशानी का भी सबब बना हुआ है। यहां होने वाले प्रदर्शनों के कारण इन लोगों को अक्सर यातायात जाम की स्थिति का सामना करना पड़ता है।

एक सरकारी कर्मचारी का कहना था कि सरकार को इस पर्यटक स्थल की सुंदरता बनाए रखने के लिए यहां रैलियों और धरना-प्रदर्शनों पर रोक लगा देनी चाहिए। इन सब समस्याओं के होते हुए भी जंतर-मंतर आज भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बना हुआ है।
 

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