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दो टूक

ऐसा अक्सर होता है। समाजवादी बातें करते रह जाते हैं जबकि पूंजीवादी हकीकत में गरीब-गुरबों का भला कर जाते हैं! जिस बाजार में आम रिक्शावाले के हाथ में मोबाइल थमाया था, उसी ने अब पंक्चर लगाने वालों को चमचमाती कार की चाबी सौंपी है। नैनो की लॉटरी खुलने से न जाने कितने साधारण लोगों की आबरू बढ़ी है। फरीदाबाद के चंद्रभान गुप्ता ऐसे ही एक भाग्यशाली हैं। लेकिन सपना सिर्फ उनका ही पूरा नहीं हुआ। भारतीय उद्योगजगत की एक बहुत प्रतिष्ठित हस्ती का सपना भी पूरा हुआ। रतन टाटा ने स्कूटर पर सफर करते एक परिवार को बारिश में भीगते देखने के बाद यह सपना बुना था। अब उनका सपना लाखों सपनों की आधारशिला बन गया है। अतीत के कई उद्योगपतियों की तरह उन्होंने भी दिखा दिया कि पूंजीपति भी राष्ट्रनायक हो सकते हैं! स्वप्नदर्शी हो सकते हैं!

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