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युवा और सेविंग

अकसर युवावस्था में लोग पर्सनल फाइनेंस से जुड़े मसलों सेविंग, निवेश में दिलचस्पी कम रखते हैं। कॉलेज के कोर्स में भी पर्सनल फाइनेंस विषय नहीं होता। ऐसे में युवाओं को यह जानकारी ही नहीं हो पाती कि कैसे पैसों को मैनेज किया जाए जिसकी वजह से अकसर युवावस्था में प्लानिंग न करने का खामियाज आगे उठाना पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि कुछ बातों को ध्यान में रखा जाए। अगर आप पैसे को मैनेज खुद करना नहीं सीखेंगे, तो आगे आपको इसका काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

-  फाइनेंशियल प्लानर पर निर्भरता न रखें क्योंकि उस पर निर्भरता होने से जहां एक तरफ आपको उसके काम के लिए फीस अदा करनी पड़ेगी, वहां बदलती जरूरतों के हिसाब से आप अपनी प्लानिंग नहीं कर पाएंगे।

-  पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी किताबें पढ़ना शुरू करें इससे आपका ज्ञान तो बढ़ेगा ही, साथ ही आप बाजार के बदलते रुख के अनुसार अपनी योजना को अंजाम दे पाएंगे। अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन खुद ही करें।

-  एक समस्या जिससे आपको अकसर दो-चार होना पड़ता होगा वह यह कि महीना खत्म होने से पहले ही आपका बैंक बैलेंस जीरो। इस दौरान आपके मन में हमेशा यह सवाल उठता होगा कि आखिर मैंने खर्च कहां किया। जरूरी है कि आप अपने रोजमर्रा के खर्चो पर गौर करना शुरू करें, देखें कि कहां आप कहां-कहां फिजूलखर्च करते हैं।

-  इस बात को भी तय कर लें कि मुझे इस महीने अपनी सेलेरी का एक-तिहाई तो निवेश करना ही है। चाहें तो रिकरिंग खाता खोल लें या फिर कोई ऐसी योजना ले लें जिसमें आपको महीने की किश्त अदा करनी पड़े।

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