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मछली पकड़ने वालों से ओबरा डैम को खतरा

मछली का वैध एवं अवैध व्यापार ओबरा तापीय परियोजना और ओबरा डैम के लिए खतरा साबित हो सकता है। अवैध रूप से मछली मारने के लिए विस्फोटकों के उपयोग से भारी तबाही मचने की आशंका है। ओबरा तापीय परियोजना को ओबरा डैम से जाने वाले पानी के चैनल में विस्फोटकों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर मछलियां पकड़ी जा रही हैं।

इसी तरह डाउनस्ट्रीम ओबरा डैम जल विद्युत परियोजना के टेलरेस प्वाइंट तक चोपन मत्स्य समिति के मछुआरे मछली पकड़ने चले ज रहे हैं जिससे इस प्रतिबंधित क्षेत्र में नाव से आना-जना आम बात हो गयी है। मछली मारने के इस अवैध धंधे का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि चैनल में 20 किलो तक वजन वाली मछलियां पकड़ी जा रही हैं जिन्हें वाराणसी तक भेज जा रहा है।

इसी क्षेत्र में सीआईएसएफ का शस्त्रागार भी होने के बावजूद इस औद्योगिक क्षेत्र की अपेक्षित सुरक्षा नहीं की जा रही है। जून-जुलाई के महीने में पेट में अण्डे होने के कारण मछलियां मुख्य डैम से निकल कर परियोजना की ओर चैनलों में जाती है।

ओबरा रेलवे स्टेशन से कुछ दूर स्थित ये चैनल घनी झड़ियों से घिरे हैं इसलिए यहां पर मछली मारने वाले दिखायी नहीं पड़ते हैं। इसका लाभ उठाकर मछली पकड़ने वाले यहां विस्फोटकों का इस्तेमाल कर एक समय में ही कई कुंतल मछलियां पकड़ लेते हैं।

इन मछलियों को वाराणसी तक भेज जा रहा है। हालांकि परियोजना की सुरक्षा में लगी सीआईएसएफ की अपराध शाखा ने कुछ दिनों से यहां सक्रियता बढ़ायी है और कतिपय लोगों को  पकड़ा भी है जिससे अब अवैध रूप से मछली मारने वाले सतर्क हो गये हैं।

उधर जल विद्युत परियोजना के पास रेणुका नदी में चोपन मत्स्य समिति को मछली मारने का ठेका मिला है, लेकिन मछुआरे प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी चले जा रहे हैं। सीआईएसएफ कमाण्डेट के नगर से बाहर होने के कारण उनका बयान तो नहीं मिल पाया, लेकिन विभाग ने पूरे क्षेत्र में जबरदस्त कड़ाई कर रखी है।

खास तौर से विस्फोटकों के उपयोग की सूचना के बाद चैनल साइड में सतर्कता काफी बढ़ा दी गयी है। पिछले दिनों इस मामले में कई लोगों की पिटाई भी हो चुकी है।

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  • Web Title:मछली पकड़ने वालों से ओबरा डैम को खतरा