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नवाबगंज आन्दोलन की लपटें भड़कीं

पांच दिन पहले बिजली किल्लत को लेकर शुरू किया गया आन्दोलन  पुलिस ज्यादती के विरोध में पूरी तरह तब्दील हो गया है। इस आन्दोलन की लपटों ने बुधवार को आसपास की बाजारों को भी अपनी आगोश में ले लिया। नेतृत्व विहीन यह आन्दोलन उन इलाकाई नेताओं के लिए चुनौती बन गया है जो अभी तक इससे किनारा कसे हैं।
बुधवार को नवाबगंज कस्बे के अलावा वजीरगंज, दुर्जनपुर व तरबगंज के व्यवसाई भी इस आन्दोलन में कूद पड़े हैं। नवाबगंज आन्दोलन के समर्थन में उनके बाजारों की दुकानें भी पूरी तरह बन्द रहीं। युवकों की टोली बाइक से प्रशासन विरोधी नारे लगाते हुए दुकानें बन्द कराते रहे। यह सब देखने के  बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम के दिन बहादुरी दिखाने वाली पुलिस तामशबीन बन चुपचाप सब देखती रही। दूसरी तरफ पुलिस ज्यादती के विरोध में कांग्रेसियों का क्रमिक अनशन कस्बे में शुरू हो गया है। कांग्रेसी गिरफ्तार लोगों की बिना शर्त रिहाई व दर्ज मुकदमा को खत्म किए जाने की मांग कर रहे हैं।


बीते मंगलवार को कस्बे में सड़क पर उतरी महिलाओं ने दूसरे दिन भी अपना तेवर बरकरार रखते हुए अपने मांगों के समर्थन में दुकानें बन्द कराई। इसके बाद वे सभी रामलीला मैदान पर धरने पर बैठ गईं। घटना स्थल पर पांचवे दिन प्रशासन का कोई अधिकारी वार्ता के लिए नहीं पहुंचा। अलबत्ता विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के आवागमन के सिलसिला चलता रहा। दोपहर बाद सपा नेता व पूर्व मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पण्डित सिंह व बसपा विधायक रमेश गौतम के अगुवाई में तकरीबन दर्जन भर लोग पुलिस अधीक्षक से वार्ता के लिए जिला मुख्यालय कूच कर गए। आन्दोलन के पांचवे दिन कस्बेवासियों के समर्थन में पास-पड़ोस के बाजारों के उतर आने की सूचना से आन्दोलनकारी महिलाओं का उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इसी बीच थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर किए जाने की सूचना से भी लोगों का बल मिला। बुधवार के प्रात: से ही लोगों का हुजूम सड़कों पर जमा रहा तथा महिलाओं के घर से निकलते ही लोगों पूर्ण बाजार बन्दी करते हुए रामलीला मैदान पर जमा हो गए। धरने पर बैठी महिलाओं को पानी-चाय आदि पहुँचाने के जिम्मा पास पड़ोसियों ने दिनभर संभाले रखा।

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