class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दो टूक

मंगलवार को मानसून की पहली फुहार झरी। लेकिन कुछ बदनसीब ऐसे थे जिनके लिए उसने आते-आते बहुत देर कर दी। पिछले सिर्फ तीन दिनों में कोई दस लाशें राजधानी में ऐसी मिलीं जिनके जिस्म पर चोट वगैरह के निशान नहीं थे। पुलिस को नहीं पता वे कौन थे और क्यों उनकी आंखें मुंदी।

पहला अनुमान यही है कि ये अभागे गर्मी के सबसे झुलसाने वाले दौर का मुकाबला नहीं कर सके। जरूर वे आधा पेट भूखे, बीमार और बेहद गरीब लोग रहे होंगे! जिन्हें रास्ते में मुफ्त पानी पिलाने वाली प्याऊ नहीं मिली! जिन्हें किसी भंडारे का अन्न प्रसाद में नहीं मिला! इनमें से कोई अपने अधिकारों का हिसाब मांगने शीला दीक्षित सरकार के पास नही आएगा। लेकिन उनकी खामोश मौत में भी कितना शोर है! कितना खौफ है!

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दो टूक