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अभिभावकों का गुस्सा चरम सीमा पर, उग्र आंदोलन के लिए तैयार

प्रदेश की मुख्यमंत्री अगर सामने से कोई आदेश दे देती हैं तो उसे माना जाता है। मगर सीएम किसी माध्यम से आदेश देती हैं तो उसके लिए लिखित अध्यादेश का इंतजार किया जाता है। फीस वृद्धि पर मुख्यमंत्री मायावती की ओर से लगाई गई रोक को निजी स्कूलों में लागू करने के लिए जिला प्रशासन को अध्यादेश का इंतजार है।

सीएम के आदेश के डीएम तक नहीं पहुंचने का मामला हिन्दुस्तान ने 27 जून को भी प्रकाशित किया था, जिसके बाद डीएम ने कहा था कि शासनादेश लिखित तौर पर मिलते ही कार्रवाई होगी। दूसरी ओर स्कूल मनमाने तरीके से फीस वृद्धि पर कायम हैं, जिसके विरोध में अभिभावकों का गुस्सा चरम सीमा पर है।

25 जून को राज्य की कैबिनेट बैठक में सीबीएसई, आईसीएसई व मान्यता प्राप्त गैर सरकारी स्कूलों में फीस बढ़ाने पर तत्काल रोक लगा दी गई थी। साथ ही शैक्षिक सत्र 2009-10 में फीस की दर के निर्धारण के लिए डीएम की अध्यक्षता में शुल्क निर्धारण नियमन समिति के गठन का भी फैसला लिया गया था, जिसका लिखित आदेश अभी तक जिला प्रशासन के पास नहीं पहुंचा है।

एडीएम (प्रशासन) ओ. पी. आर्या ने कहा कि जब तक सरकारी आदेश नहीं आ जता, जिला प्रशासन बाध्य है। आदेश आते ही निजी स्कूलों को सकुर्लर जारी कर दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर स्कूल फीस वृद्धि के फैसले पर कायम है। अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए अल्टीमेटम भी दिया जा चुका है।

अभिभावक मनोज ने कहा कि गर्मियों की छुट्टी के बाद स्कूल खुलने वाले हैं, ऐसे में अभिभावकों को फीस जमा करनी है। कैबिनेट की बैठक में जब फैसला ले लिया गया है, तो डीएम को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

मनोज ने कहा कि बुधवार को अभिभावकों का एक दल अथॉरिटी के सीईओ मोहिंदर सिंह से मुलाकात करेगा और सीईओ कैबिनेट के फैसले की जानकारी दी जाएगी। मनोज ने कहा कि फीस वृद्धि पर अथॉरिटी और जिला प्रशासन लगाम नहीं कसती है तो अभिभावक उग्र आंदोलन करेंगे।

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  • Web Title:सीएम का आदेश नहीं पहुंचा डीएम तक