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घर में बने स्नैक्स ही बेहतर

आधुनिकता के नाम पर आज नए किस्म के स्नैक्स का प्रचलन बढ़ रहा है। आजकल कई बच्चे घर का खाना खाने के बजाय बाहर का खाना ज्यादा पसंद करते हैं, लेकिन शायद वे इस बात से अनजान होते हैं कि पेकेट बंद स्नैक्स का लगातार सेवन स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है। हम किसी भी भोजन की सुगंध से जान लेते हैं कि उसमें क्या है और वह कितना स्वादिष्ट है। लेकिन जब हम कोई स्नैक खाते हैं, तब न तो उसकी सुगंध पर और न ही स्वाद पर ध्यान जाता है।

कम्पनियां इस तथ्य को अच्छे से जानती हैं और भुना भी रही हैं। इसी कारण वह अपने खाद्य पदार्थो को इतना आकर्षक व चिकनाईयुक्त बनाती हैं कि वह मुंह में डालते ही घुल जाता है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो पेकेट बंद स्नैक्स को हम जितनी जल्दी खरीदते हैं, उतनी ही जल्दी वह मुंह से पेट में पहुंच जाता है जिससे हमारी स्वाद ज्ञानेंद्रियों की क्षमता व भोजन की सुगंध दोनों प्रभावित होती हैं।

स्नैक्स में संरक्षण एवं गुणवत्ता के आधार पर मूल अनाज के चोकर व रेशे को निकाल दिया जाता है और फिर इसमें तरह-तरह के खाद्य पदार्थ मिलाए जाते हैं। कुछ कृत्रिम रंग एवं कृत्रिम खुशबू भी स्नैक्स को आकर्षक बनाने के मिलाए जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।

पेकेट बंद स्नैक्स में विटामिन ‘सी’ और ‘ए’, कैल्शियम तथा लौह तत्वों की कमी होती है। इस कारण लंबे समय तक इसका सेवन करने से शरीर में अनेक तरह के रोग पैदा हो सकते हैं। आंखों की ज्योति बरकरार रखने के लिए विटामिन ‘ए’, हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम तथा रक्त की मात्रा बढ़ाने के लिए लौह तत्वों की हमें बेहद जरूरत होती है, जो इसमें प्राय: नहीं होते। विटामिन ‘सी’ भी इसमें न के बराबर होता है।

स्नैक्स को सुरक्षित रखने के लिए ‘सोडियम नाइट्रेट’ का प्रयोग किया जाता है। ऐसे ही मिठास लाने के लिए इसमें ‘सैकरीन’ का प्रयोग होता है। यह तत्व स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।

‘मोनोसोडियम’ ग्लूटामेट नामक तत्व का उपयोग पैकेट बंद स्नैक्स को लंबे समय तक ताज और स्वादिष्ट बनाए रखने के लिए किया जता है। इसे मिलाने पर इसका पता ही नहीं चलता, लेकिन इसकी वजह से प्रतिदिन इसे खाने वाले की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार डिब्बाबंद स्नैक्स का लगातार सेवन करने वाले जल्दी बीमार होते हैं क्योंकि इसमें शरीर के लिए आवश्यक फाइबरयुक्त तत्व मौजूद नहीं होते। इससे आंत की बीमारी होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसके लगातार सेवन से बच्चों का उचित शारीरिक विकास नहीं हो पाता क्योंकि उनको उम्र के मुताबिक पर्याप्त मात्रा में कैलोरी एवं पौष्टिक तत्व नहीं मिल पाते।

इसमें मसालों की अधिकता और अजीनामोटो के प्रयोग से इसके अधिक सेवन से पेट की तमाम गड़बड़ियां भी होती हैं। अगर खुद को सेहतमंद रखना हो तो पेकेट बंद स्नैक्स की आदत छोड़कर यथासंभव घर में बने स्नैक्स को अपने आहार में शामिल करें।

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