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इंजीनियरों-अफसरों की शह पर हुआ अवैध निर्माण

शहरों में हो रहे अवैध निर्माणों के लिए सैकड़ों अभियंता दोषी पाए गए, पर कार्रवाई किसी पर नहीं हुई। आवास विभाग ने फिलहाल पूरी फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी है। प्रमुख सचिव आवास श्रीकृष्ण ने करीब चार महीने पहले सूबे में हो रहे अवैध निर्माणों की सूची बनाने और इन अवैध निर्माणों के लिए दोषी अधिकारियों और अभियंताओं को चिह्नित करने के निर्देश सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों को दिए थे।

प्राधिकरणों से आई सूची के मुताबिक प्रदेश में हजरों अवेध निर्माण हुए हैं। इन अवैध निर्माणों के लिए तकरीबन 400 अधिकारी और अभियंताओं को दोषी पाया गया। केवल लखनऊ में ही 80 से अधिक अभियंता और अधिकारी दोषी पाए गए। अवैध निर्माणों के लिए ज्यादातर अधिशासी अभियंता और अवर अभियंताओं को चिह्न्ति किया गया।

प्रमुख सचिव के निर्देश पर आवास विभाग ने सभी अधिकारियों और अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई के प्रस्ताव भी तैयार कर लिए। लेकिन ऐन वक्त पर यह कार्रवाई स्थगित कर दी गई। सूत्रों के मुताबिक जब आवास विभाग के आला अफसरों ने इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों और अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की सूची देखी तो उन्होंने फिलहाल इसे कुछ समय के लिए टाल दिया। अब यह मामला आवास मंत्री के सामने पेश किया जाएगा और उसके बाद कार्रवाई की जाएगी।

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