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रहस्य ही बनकर रह जाती है सेलिब्रिटी की मौत

रहस्य ही बनकर रह जाती है सेलिब्रिटी की मौत

दुनिया में जानी-मानी हस्तियों की अचानक हुई मौतों के इर्द-गिर्द हमेशा रहस्य का ताना-बाना बुना जाता रहा है। महान पॉप गायक माइकल जैक्सन हो या अभिनेत्री मर्लिन मुनरो, गायक एल्विस प्रेस्ले हों या बीटल के जॉन लैनन। इन सभी की मौतों पर पड़ा रहस्य का परदा आज भी पूरी तरह उठ नहीं पाया है।

माइकल जैक्सन का जब दिल का दौरा पड़ने से गत गुरुवार को निधन हो गया, तब कुछ ही घंटों के भीतर इस तरह की साजिश की खबरें सामने आने लगीं। कुछ लोगों ने इसे फर्जी मौत करार देते हुए कहा कि अपने दीवालिएपन से बचने और मीडिया की नजरों से दूर रहने के लिए जैक्सन ने अपनी मौत की कहानी बुनी है। हालांकि मेडिकल रिपोर्टो में दवाओं की अधिक खुराक का सेवन उनकी मौत का कारण बताया था।

बहरहाल जैक्सन की मौत इस तरह का पहला मामला नहीं है। वर्ष 1962 में मर्लिन मुनरो की लॉस एंजेलिस स्थित घर में मृत्यु से भी कई प्रकार की साजिश की बातें सामने आयी। पोस्टमार्टम के बाद उनके शरीर से कई दवाओं का मिश्रण प्राप्त हुआ था और काउंटी कोरोनर ने मौत का कारण शरीर में अधिक बारबिटयूरेट दवाओं के कारण जहर फैलना बताया था।

उल्लेखनीय है कि बारबिट्यूरेट केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाली दवाएं हैं और ये नींद भी लाती हैं। बहरहाल मर्लिन की मृत्यू को लेकर कयास अब भी लगाये जाते हैं और ये पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी और उनके भाई रॉबर्ट केनेडी के इर्द-गिर्द ाूमती है।  सबसे चर्चित आरोप है कि उनकी हत्या सीआईए या माफिया ने की, क्योंकि वह केनेडी के संगठित अपराध से जुड़े होने के संबंध में कई बातें जान गयी थी।

इसके बाद अगली मौत का मामला 1977 में एल्विस प्रेस्ले का है । प्रेस्ले को उनके गार्सलैंड स्थित घर के बाथरूम के फर्श पर मृत पाया गया था । 1977 की इस घटना को लेकर साजिश की कहानियां आज भी हवा में तैरती हैं । इस महान गायक के शव का दो बार पोस्टमार्टम किया गया, जिसमें यह निष्कर्ष निकला की उनकी मत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई।

लेकिन अब भी उनकी मत्यु पर रहस्य का परदा पड़ा हुआ है और कई तरह की कहानियां सुनने को मिलती हैं। उसमें से प्रमुख है कि उन्होंने अपने रिकार्ड की बिक्री में तेजी लाने के लिए अपनी मौत का स्वांग रचा था। तीन दशकों से हजारों लोगों ने प्रेस्ले को कई मौकों पर देखने की बात कही।

इसी प्रकार 1980 के दशक में पूर्व बीटल सदस्य जॉन लेनन की मत्यु को लेकर भी साजिश की कई बातें चर्चित हैं। न्यूयार्क में डकोटा की इमारत में लेनन की मार्क डेविड चैपमैन ने आठ दिसंबर 1980 को गोली मार कर हत्या कर दी थी । हत्या के आरोप में उन्हें जेल की सजा दी गयी और वह अब भी जेल में है। लेकिन सबसे बड़ी चर्चित साजिश है की उनकी हत्या रिमोट कंट्रोल से की गयी।

इस दावे में यकीन रखने वालों का मानना है कि चैपमैन को अमेरिकी सरकार के एजेंटों ने लैनन को मारने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया था।


पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या को लेकर भी रहस्य अभी तक बरकरार है। इस हत्या की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी एक आयोग का गठन किया है। उनकी हत्या के पीछे कभी तात्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ तो कभी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ माना जाता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी की मौत भी एक रहस्य ही बन कर रह गई। उनकी हत्या के पीछे कई कारणों के बारे में चर्चा की गई, जिसमें माफिया, क्यूबा के राष्ट्रपति पिदेल कास्त्रो, एफबीआई तथा सरकार के अन्य तंत्र शामिल थे। केनेडी की हत्या करने वाले ली हार्वे ओस्वाल्ड के बारे में जानकारों का मानना है कि ऐसा नहीं हो सकता कि अकेले ही उसने केनेडी की हत्या की साजिश रच दी।

हाल ही में श्रीलंका के विद्रोही संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) के प्रमुख प्रभाकरण की मौत पर भी रहस्य बरकरार ही रहा। सेना जहां यह दावा करती है कि उसने एनकाउंटर में प्रभाकरण को मार गिराया, लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि उसने आत्महत्या की। प्रभाकरण के बारे में कहा जाता था कि वह हमेशा एक साइनाइट की गोली साथ रखता था, फिर ऐसा कैसे हुआ कि महीनों संघर्ष चलने के बाद बुरी तरह घिरने के बाद भी उसने आत्महत्या नहीं की।

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