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लिब्राहन आयोग ने प्रधानमंत्री को सौंपी रिपोर्ट

लिब्राहन आयोग ने प्रधानमंत्री को सौंपी रिपोर्ट

अपने गठन के 17 साल बाद लिब्राहन आयोग ने 1992 में अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की जांच रिपोर्ट को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंप दी।

जांच के दौरान आयोग का कार्यकाल 48 बार बढ़ाया गया, जिसके द्वारा तैयार रिपोर्ट सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएस लिब्राहन ने गृहमंत्री पी चिदंबरम की मौजूदगी में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी। रिपोर्ट के सार तत्व का तत्काल पता नहीं चला है।

छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के 10 दिन के भीतर गठित आयोग किसी घटना की सबसे लंबे समय तक जांच करने वाला आयोग बन गया। बाबरी मस्जिद ढहने के बाद देशभर में बड़े पैमाने सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे। आयोग को इस बारे में पहले अपनी रिपोर्ट 16 मार्च 1993 को सौंपनी थी, लेकिन यह अपनी जांच पूरी करने के लिए बार-बार सेवा में विस्तार किए जाने की मांग करता रहा। इसे इस साल मार्च में तीन महीने के लिए विस्तार दिया गया।

यह जांच समिति सर्वाधिक खर्चे वाले आयोगों में से एक है, जिस पर लगभग आठ करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। यह पैसा वेतन और इसके अतिरिक्त दी जाने वाली अन्य सुविधाओं पर खर्च हुआ । आयोग की 400 से अधिक बैठकें हुईं, जिसने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बयान दर्ज किए। समिति ने 2005 में अंतिम गवाह को सुनकर जांच पूरी की।

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