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बेहतर जॉब के विकल्प ब्राडकास्टिंग और कारपोरेट कम्युनिकेशन में

ये हैं आवश्यक
स्टूडियो साउंड इंजीनियर बनने के लिए जरूरी है कि आपको संगीत और रिकॉíडंग तकनीक की बेहतर जानकारी हो। इसके अलावा आपको भौतिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स की समझ बेहतर होनी चाहिए। आप स्टूडियो रिकॉíडंग में बतौर असिस्टेंट काम कर सकते हैं। इसमें आप रोजमर्रा के काम को बांट कर कर सकते हैं। वहां आप स्टूडियो में उपकरणों के इस्तेमाल और रिकॉíडंग सेशन में इनके प्रयोग के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप अपनी पहली जॉब तलाश करने जा रहे हैं, तो इससे पहले स्टूडियो का प्रायोगिक अनुभव आपके लिए मददगार हो सकता है।

कहां है अवसर
म्यूजिक टेक्नोलॉजी कोर्स आपके लिए मददगार हो सकते हैं। साथ ही आप विभिन्न गतिविधियों जसे कि लोकल म्यूजिक प्रोगाम और डीजे प्रोजेक्ट, एफ या सामुदायिक रेडियो, म्यूजिक की मिक्सिंग और रिकॉíडंग कर अपना अनुभव बढ़ा सकते हैं।

इसके अलावा साउंड इंजीनियरिंग और साउंड टेक्नोलॉजी में सíटफिकेट कर नौकरी तलाशने के अपने मौकों को बढ़ा सकते हैं। साथ ही आप तकनीकी स्किल जैसे कि सिक्वेसिंग, मास्टिरिंग, एडिटिंग और रिकॉíडंग को भी स्पेशलाइज्ड कोर्स के रूप में ज्वॉइन कर सकते हैं।

अनुभव के बाद आप ऑडियो रिकॉíडंग और स्टूडियो मैनेजमेंट में प्रोफेशनल डिप्लोमा कर सकते हैं। अगर आप टीवी या फिल्म की तरफ जना चाहते हैं, तो कई तरह के शॉर्ट कोर्स बाजर में मौजूद हैं। आप रिकॉíडंग स्टूडियो में फुल टाइम काम कर सकते हैं। चाहें तो स्वरोजगार भी कर सकते हैं या फिर फ्रीलांस भी काम कर सकते हैं।

देश के बड़े स्टूडियो मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद और अहमदाबाद में है। इस क्षेत्र में नौकरियों के विज्ञापन नहीं दिए जते हैं, इसलिए आपको इस इंडस्ट्री में लगातार अपडेट करते रहना चाहिए। वहीं रेजुल पोकट्टी के ऑस्कर पुरस्कार जीतने के बाद से साउंड मिक्सिंग एक बेहतर करियर विकल्प के रूप में सामने आया है।

कारपोरेट कम्युनिकेशन
गौर करने वाली बात है कि आप बिल गेट्स और माइक्रोसॉफ्ट के बारे में इतना जानते कैसे हैं, जबकि आप इसका विज्ञापन कभी-कभार ही देखते हैं। ऐसे में कारपोरेट कम्युनिकेशन की भूमिका काफी अहम हो जती है। कारपोरेट कम्युनिकेशन इस बात के प्रति पूरी तरह आश्वस्त करता है कि संस्थान और उपभोक्ताओं के बीच संवाद बना रहे और इससे लोगों के साथ कंपनी को फायदा मिले।

कारपोरेट कम्युनिकेशन किसी संस्थान को पब्लिक के सामने प्रोजेक्ट करता है और उसकी लांग टर्म  साख बनाने में मददगार होता है। यह मैनेजमेंट का काम होता है कि संस्थान को आमजन के सामने इस तरह प्रदíशत करना कि वह सिर्फ लाभ कमाने वाला संस्थान न लगे।

मोटे तौर पर कहा जाए, तो पब्लिक में किसी संस्थान की इमेज बनाने का काम कारपारेट कम्युनिकेशन का होता है। इसके लिए वह अपने पार्टनर, कोलोबरेटर, वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर काम करता है। कारपोरेट कम्युनिकेशन के मुख्य माध्यम सामाजिक संबध और  कम्युनिकेशन हैं। कारपोरेट कम्युनिकेशन में पब्लिक रिलेशन, विज्ञापन और मार्केटिंग भी शामिल होते हैं।

लंबा है दायरा
कारपोरेट कम्युनिकेशन के क्षेत्र में कई काम होते हैं। मीडिया या प्रेस रिलेशन डिपॉर्टमेंट संस्थान की मीडिया कवरेज के लिए उत्तरदायी होता है। यह प्रेस कांफ्रेंस करने, प्रेस विज्ञप्ति जरी करने, वक्तव्यों को जरी करने और विजुअल और प्रिंट मीडिया के लोगों के संपर्क में रहना।

अधिकतर संस्थान आंतरिक और बाह्य कम्युनिकेशन विभाग होते हैं। बाह्य कम्युनिकेशन का इस्तेमाल संस्थान कंपनी की पब्लिक के बीच इमेज बनाने, मार्केटिंग और ब्रांड मैनेजमेंट का काम करता है। सीधे तौर पर कहा जए, तो पब्लिक को सही जनकारी प्रदान करने का काम करता है।

आंतरिक कम्युनिकेशन संस्थान के अंदर ही काम करते हैं। यह विभिन्न विभागों से तालमेल स्थापित करते हैं। इसमें इनहाऊस लैटर की एडिटिंग से लेकर कंपाइलिंग तक का काम होता है, साथ ही सामाजिक लोगों को एकत्रित करने, फर्म से सीधा संवाद स्थापित करने, स्लाइड-शो, ग्रुप डिस्कशन, ट्रेनिंग प्रोगाम और प्रोत्साहन से जुड़ी गतिविधियां शामिल होती हैं।

शैक्षिक योग्यता
मास कम्युनिकेशन या कम्युनिकेशन मैनेजमेंट का कोर्स इससे संबधित स्किल और ज्ञान पैदा करने में मदद करता है। मार्केटिंग कम्युनिकेशन और मीडिया मैनेजमेंट में कारपोरेट कम्युनिकेशन विषय के बारे में जनकारी देते स्पेशलाइज्ड कोर्स हैं। ज्यादातर कोर्स परास्नातक स्तर के होते हैं, जिनको करने के लिए स्नातक डिग्री होनी चाहिए। स्नातक स्तर पर कॉमर्स या बिजनेस या सामाजिक विज्ञान, दर्शन विज्ञान, इकोनॉमिक्स विषयों को ज्यादा तरजीह दी जाती है। अगर आप इस क्षेत्र में काम रहे हैं, तो शॉर्ट टर्म और रिफ्रेशर कोर्स कर सकते हैं।

क्या है जरूरी
इस क्षेत्र के प्रोफेशनल्स को बिजनेस की बदलती जरूरतों, संस्थान की मार्केटिंग रणनीति के बारे में जानकारी होनी चाहिए। साथ ही आपका आत्मविश्वास और कम्युनिकेशन स्किल बेहतर होना चाहिए। आपका व्यक्तित्व आकर्षक हो, लोगों से घुलना-मिलना, अलग-अलग स्वभाव के व्यक्तियों से तारतम्य स्थापित करना आना, बेहतर लेखन व रचनात्मक सोच से अलग तरह की प्रस्तुति की क्षमता होना आवश्यक है।

कम नहीं मौके
बढ़ते निजीकरण की वजह से कारपोरेट कम्युनिकेशन के लोगों की मांग बढ़ी है। कारपोरेट कम्युनिकेशन प्रोफेशनल की मांग अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों, एनजीओ में भी है। वहीं सरकारी संस्थानों में भी इनकी भूमिका एक पीआर से ज्यादा हुई है। कमíशयल संस्थानों, सरकारी संस्थानों, विज्ञापन एजेंसी, इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों, होटल और टूरिज्म संस्थानों, सलाहकार फर्म, वित्तीय सेवाओं, अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए अपार अवसर हैं। अनुभव के बाद आप स्वंय की कम्युनिकेशन कंसलेटेंसी खोल सकते हैं।                           

ब्राडकॉस्टिंग
साउंड इंजीनियर उच्च गुणवत्ता के संगीत, भाषणों को स्टूडियो में रिकॉर्ड करते हैं। ध्वनि को रिकॉर्ड करने के लिए उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। इनका प्रसारण कॅमíशयल म्यूजिक रिकॉíडंग, रेडियो, टीवी, फिल्म और कॅमíशयल, कारपोरेट वीडियो और मोबाइल गेम पर होता है।

साउंड इंजीनियर के कई काम होते हैं। 
- कलाकारों और निर्माताओं के साथ रिकाíडंग करना
- स्टूडियो में माइक्रोफोन और अन्य उपकरण स्थापित करना
- ध्वनि के स्तर को सामान्य रखना 
- मिक्िसंग, मास्टरिंग, सैंपलिंग के लिए उपकरणों का प्रयोग करना 
- प्रत्येक इंस्ट्रमेंट और आइटम के अलग ट्रेक बनाना
- कई ट्रेक को एक साथ मिलाकर मास्टर ट्रेक बनाना 
- स्टूडियो ऑर्काइव में टेप की लॉगिंग करना 
- अनुभव के बाद आप स्टूडियो मैनेजर भी बन सकते हैं

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