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रैगिंग से बचें

स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय स्तर पर रैगिंग को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से कई कड़े कदम उठाए गए हैं, लेकिन इनका लाभ तभी सम्भव है जब पीड़ित पक्ष इसकी शिकायत को लेकर गम्भीर हो। रैगिंग की समस्या के समाधान के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज की ओर से इस दिशा में कई कदम उठाये गए हैं।

यहां वर्ष 2007 में जहां होस्टल में शिक्षकों ने डयूटी दी तो गत वर्ष यहां कॉलेज स्तर पर हेल्पलाइन चलाकर रैगिंग की रोकथाम की। हाल में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नेशनल हेल्पलाइन सेवा की शुरुआत की है। रैगिंग हो तो 1800-180-5522 पर कॉल करें तो तुरंत कार्रवाई होगी।

- कॉलेज स्तर पर प्रोक्टोरियल बोर्ड या कॉलेज रैगिंग शिकायत पेटी के माध्यम से भी आप इस समस्या का हल कर सकते हैं।

- विशेष स्क्वॉड से सम्पर्क कर भी इस समस्या का समाधान हो सकता है। आज हर कॉलेज, विश्वविद्यालय में नए छात्रों की मदद से लिए रैगिंग कंट्रोल स्क्वॉड की व्यवस्था रहती है।

- रैगिंग सबसे ज्यादा होस्टलों में होती है। यही कारण है जिसके लिए आज शिक्षण संस्थानों के होस्टलों में 24 घंटे सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और स्थायी वॉर्डन की व्यवस्था लागू की जा रही है। वॉर्डन एक ऐसा व्यक्ति है जो सर्वप्रथम आपका मददगार साबित होता है।

- रैगिंग के निदान के लिए प्रशासन के साथ-साथ रैगिंग से दो-चार होने वाले छात्रों का जगरूक होना जरूरी है। आज कॉलेज में सुनवाई न होने पर, विश्वविद्यालय और वहां भी सुनवाई न होने पर सीधे पुलिस शिकायत का रास्ता खुला है।

- रैगिंग करने वालों के लिए भी अब कार्रवाई इतनी सख्ती कर दी गई है कि आरोप साबित हो जाने पर डिग्री-डिप्लोमा में कारनामा दर्ज हो जाएगा।

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