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वायुसेना करेगी सदी के सबसे लम्बे सूर्य ग्रहण का पीछा

इस सदी के सबसे लम्बे सूर्य ग्रहण के समय भारतीय वायुसेना के दो विमान इस अदभुत खगोलीय परिघटना को कैमरों में कैद करने के मिशन पर रवाना होंगे। यह सूर्य ग्रहण 22 जुलाई को सुबह साढ़े आठ बजे से पूर्वाह्न 11 बजे तक भारत, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार, चीन और जापान के रास्ते से होकर गुजरेगा तथा जापान के रियूकू द्वीपसमूह में इसकी सबसे अधिक छह मिनट 39 सेकंड की अवधि होगी जब पृथ्वी अंधकार में डूब जाएगी। लेकिन इस अंधकार को चीरते हुए भारतीय वायुसेना का मिराज 2000 लड़ाकू विमान ग्वालियर से रवाना होगा और अपने कुशाग्र कैमरों से सूर्य ग्रहण के बाद हीरे की अंगूठी जैसे खगोलीय नजारे को वैज्ञानिक समुदाय के लिए कैद कर लेगा। मिराज के अलावा भारतीय वायुसेना का परिवहन विमान एएन 32 वैज्ञानिकों और कैमरामैन के दल को लेकर जोरहाट या पटना से उड़ान भरते हुए आगरा की उड़ान पर रवाना होगा और धरती पर पड़ रही चांद की परछाईं, जिसे वैज्ञानिक शब्दावली में अम्ब्रा कहते हैं, के उलट दिशा में बढ़ेगा।


वायुसेना के एक अधिकारी ने बताया कि इस मिशन में एक गैर सरकारी संगठन विज्ञान प्रसार के अलावा उदयपुर सौर वेधशाला और भारतीय खगोल भौतिकी विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के वैज्ञानिकों के लिए एएन 32 के विमान अपने पिछले हिस्से के स्लाइड को खोल देगा और वहां से खुले आकाश में हो रही सूरज तथा चांद की अठखेलियों को इतिहास की धरोहर बनाने में मदद करेगा।

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