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रिकवरी एजेंटों की मनमानी

एक व्यक्ति के लिए आईसीआईसीआई बैंक से मोटरसाईकिल फाईनेंस कराना आफत साबित हुआ। तय किस्तों का भुगतान करने के बाद भी बैंक ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। एक दिन अचानक घर के बाहर खड़ी मोटरसाईकिल को रिकवरी एजेंट उठा कर ले गए। मालिक ने मोटरसाईकिल चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की जांच के दौरान बैंक के गैरजिम्मेदाराना रवैये का खुलासा हुआ। दरअसल एक तरफ बैंक ने मोटरसाईकिल मालिक को किस्तों की भरपाई के एवज में अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया। वहीं, दूसरी तरफ किस्तें न भर पाने की बात कहते हुए मोटरसाईकिल रिकवरी के आदेश जारी कर दिए। इस मामले में मयूर विहार थाना पुलिस ने आईसीआईसीआई के रिकवरी एजेंट सुनील समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। हैरत की बात तो यह है कि मामले से पर्दा उठने के बाद भी मोटरसाईकिल का अभी तक कोई अता-पता नहीं है।


पेश मामले के अनुसार त्रिलोकपुरी इलाके में रहने वाले चुन्नी लाल ने मयूर विहार थाने में अपनी मोटरसाईकिल नम्बर डीएल-4एसएक्यू-9040 के चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। तफ्तीश में पाया गया कि वाहन की जब्तीकरण के आदेश बैंक ने ही दिए थे। पुलिस ने आईसीआईसीआई के झंडेवालान कार्यालय से संपर्क साधा, तो पता चला कि इस मोटरसाईकिल की सभी किस्तें समय से भर दी गई हैं। वहीं, रिकवरी एजेंट सुनील ने भी बाकायदा मोटरसाईकिल के जब्तीकरण के दस्तावेज पेश किए। मामला उलझता देख पुलिस ने रिकवरी एजेंट सुनील समेत तीन लोगों को गिरफ्त में लिया। मामले की तह तक जाने के लिए आरोपी सुनील को कड़कड़डूमा स्थित मेट्रोपोलिटिन मजिस्ट्रेट वी के गौतम की अदालत से एक दिन की रिमांड पर लिया गया। पूछताछ में एजेंट ने बताया कि उसने मोटरसाईकिल उठाई जरुर थी। लेकिन गलती का एहसास होने पर अगले ही दिन वह मोटरसाईकिल को शिकायतकर्ता के घर के बाहर खड़ा कर गया था। बहरहाल आरोपी तो जेल में हैं। परन्तु अभी भी मोटरसाईकिल का कोई अता-पता नहीं है। मयूर विहार थाना पुलिस ने माना है कि उनके पास मोटरसाईकिल के जब्तीकरण व किस्त अदायगी समेत अन्य दस्तावेज मौजूद हैं।

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  • Web Title:रिकवरी एजेंटों की मनमानी