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पूर्व निगमायुक्त के निर्देश की अवहेलना कर रहे निगम अधिकारी

तीस वर्षो से वाटर कनेक्शन के लिए हाथ पैर मारने वालों को कनेक्शन दिए  बिना नगर निगम लगातार पानी के बिल भेजे जा रहा है। लोग इससे खफा हैं। उधर, निगम अधिकारी कहते हैं कि वहां पर कनेक्शन लगा हुआ है इसलिए उनको बिल भेजे जा रहे हैं। वह लोगों से बिल भराने पर आमादा है। हालांकि पूर्व नगर निगमायुक्त आरके खुल्लर ने पानी का कनेक्शन न होने की सूरत में पहुंचे बिलों को निरस्त करने का आश्वासन दिया था। अब हालत है कि निगम दफ्तर के बार-बार चक्कर काटने पर भी बिल को निरस्त नहीं किया जा रहा है।

दिल्ली बार्डर पर बसे पॉश कालोनी दयालबाग में करीब तीन दशकों से पानी की किल्लत बनी हुई है। यहां के लोग पानी के कनेक्शन के लिए लगातार भाग दौड़ कर रहे हैं। पिछले वर्ष पूर्व कमिश्नर ने उनसे सभी टैक्स जमा कराने व वहां पर पानी की लाइन के लिए 11 हजार रुपये की स्कीम दी थी। लोगों ने कनेक्शन लेने के लिए 11 हजार रुपये निगम को दे दिए। बावजूद इसके आज तक उनकी यह समस्या दूर तो नहीं हुई। इसके उलट उन्हें पानी के बिल भेजने का सिलसिला शुरु हो गया। बिल लेकर वे निगमायुक्त के दफ्तर के लगातार चक्कर काट रहे हैं। पूर्व निगमायुक्त के बिल निरस्त करने के आश्वासन के बाद भी निगम अधिकारी बिल भराने पर आमादा हैं। कालोनी के विनोद शंकर दूबे का कहना है कि नगर निगम को अनेक बार कनेक्शन देने को कहा गया। कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे वे पानी खरीदकर काम चलाने को मजबूर हैं।

ऊपर से बिल भेज एक नई सिरदर्दी बढ़ गई है। संजीव शर्मा कहते हैं कि पानी का कनेक्शन तो अब तक उन्हें नहीं मिला 1500 रुपये के हिसाब से लगातार बिल आ रहा है। आर के त्यागी व अखलेश कुमार शर्मा की भी यही शिकायत है। आरडब्ल्यूए प्रधान सुभाष घोष का कहना है कि पूर्व निगमायुक्त के निर्देश के बाद भी अधिकारी बिल भरवाने पर आमादा हैं। जबकि पानी की लाइन तक घरों में नहीं पहुंची है। एक्सईएन अनिल मेहता का कहना है कि इन्होंने झूठ बोलकर कनेक्शन रेगुलर कराए , इसलिए बिल माफ नहीं होंगे।

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