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समलैंगिकता पर अलग हैं गुलाम नबी के स्वर

समलैंगिकता पर अलग हैं गुलाम नबी के स्वर

समलैंगिकता को कानूनी रूप से मान्यता देने के मामले में लगभग यू टर्न लेते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफतौर पर कहा कि यह एक बड़ा मामला है और इस पर संसद के साथ ही टेलीविजन और रेडियो के जरिए भी चर्चाएं कर आम राय बनाने की जरूरत है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को हटाने के बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद की राय जानने के लिए जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किए तो आजाद ने साफतौर पर कहा कि यह एक ऐसा विषय है जिसकी अच्छाइयों और बुराइयों पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए ताकि आम लोग इसके सभी पहलुओं को जान सकें और उन पर विस्तृत विचार कर सकें और फिर एक आम राय कायम कर सकें। ज्ञातव्य है कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रामदास समलैंगिकता को कानून सम्मत बनाने के पक्षधर थे।

आजाद ने कहा कि इस पर संसद में और संसद के बाहर, सरकार के स्तर पर तथा सभी राजनीतिक पार्टियों के साथ बातचीत कर एक आमराय बनानी होगी। उन्होंने कहा कि इसके बारे में केवल कुछ ही लोगों ने सुना होगा। यह एक बड़ा मामला है जो हमारी संस्कृति से जुड़ा है, एक ओर इससे कई बीमारियां जुड़ी हैं तो दूसरी ओर इसके कारण कई लोगों को प्रताडना ङोलनी पड़ती है। इसलिए इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर हर स्तर पर आमचर्चा की जरूरत है।

दूसरी ओर कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने सोमवार को यहां पार्टी की नियमित ब्रीफिंग में कहा कि समलैंगिकता को कानूनी अधिकार देने के बारे में फैसला सरकार को करना है और यह काम उसी को करने देना चाहिए। इस मुद्दे पर पार्टी की राय पूछे जाने के बारे में उन्होंने कहा कि इस मसले पर पार्टी की कोई राय नहीं है और न ही इस पर पार्टी में कोई विचार विमर्श हो रहा है

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