class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

टैक्सों के रूप में निगम को लगाया जा रहा है पलीता

नगर निगम के राजस्व की रीढ़ मानी जाने वाली टैक्स की कड़ी कमजोर है। हाउस टैक्स को छोड़कर करीब 130 हैड के अधिकांश टैक्सों का समूचा रिकार्ड निगम के पास नहीं है। इससे बकाया राशि के असली आंकड़े सामने नहीं आ पा रहे हैं। कितनी यूनिटों पर कितना बकाया है? इसको लेकर अफसरों में जबदरस्त खींचतान है। अपनी कमजोरी छिपाने के लिए कई अफसर पुराने रिकार्ड को छेड़ना नहीं चाहते हैं। जबकि रिकवरी के बढ़ते दबाव में अब निगम अफसरों को बाकी टैक्स की भी याद आ रही है। इसमें लाइसेंस टैक्स ऐसा महत्वूपर्ण हैड है। जिसकी बकाया राशि वसूलकर निगम आर्थिक हालत सुधार सकता है।


रिहायशी क्षेत्र में हाउस टैक्स माफी के बाद निगम का काफी राजस्व कम हो गया। कमर्शियल व औद्योगिक टैक्स से ही कुछ राजस्व मिल पा रहा है। उद्योग, कमर्शियल स्थल, दुकान, खोखे आदि पर लाइसेंस फीस लागू होती है। वर्ष 1998 में यह फीस तय हुई। यूनिट चिह्न्ति करके लाइसेंस फीस लगा दी गई। सालाना बजट में इसकी अनुमानित आय भी दर्शाई जाती है। मगर कितनी रिकवरी हो गई, कितना बकाया है? इसका समूचा रिकार्ड नहीं है। कई हैड तो ऐसे हैं। जिनकी समीक्षा करने की जहमत अफसरों ने नहीं उठाई। इस दौरान कई गुणा यूनिट शहर में बढ़ गई। सव्रे न होने से नई यूनिट फीस के दायरे में अभी नहीं ली गई हैं। जबकि इनसे वसूली करने के आरोप कर्मचारियों पर लगते रहे हैं। रिकार्ड में न होने से वसूली गई राशि को जेब में भर लेते हैं। टैक्स कम करने के लिए पिछले वर्ष रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए कर्मचारी इसकी तस्दीक करते हैं। बहरहाल, हाउस टैक्स रिकवरी में भी निगम के कर्मचारी लापरवाही बरतते हैं। जिसकी वजह से राजस्व एकत्रित नहीं हो पा रहा है। खास बात है कि हाउस टैक्स रिकवरी पर ही अफसरों का ज्यादा जोर है। पिछले वर्ष करीब 26 करोड़ और नए वित्त वर्ष में अब तक करीब 21 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। सूत्रों के मुताबिक हाउस टैक्स की तरह बाकी टैक्सों समीक्षा करके रिकवरी शुरू कर दी जाए तो निगम की आर्थिक तंगी काफी हद तक दूर हो सकती है।
-----------------------------
टैक्सों से निगम की अनुमानित आय

टैक्स का नाम                        आय               
हाउस टैक्स                           28 करोड़                        
सिनेमा शो टैक्स                       10 लाख
वाटर रेट                               14 करोड़
बिजली उपयोग कर                     7.50 करोड़
फायर टैक्स                             1.60 करोड़
व्हीकल टैक्स                           2 करोड़          
स्टैम्प ड्यूटी                             35 करोड़
डेनजर्स एंड ओफैन्जिस-                3 करोड़
(औद्योगिक लाइसेंस)
बिल्डिंग एप्लीकेशन फीस               2.75 करोड़
कोपिंग फीस                             10 हजार
तहबजरी फीस                           20 लाख
विज्ञापन फीस                             3 करोड़
सीवरेज चाजिर्स                           30 लाख
स्लाटर हाउस फीस बाई लाज             2 लाख
प्लोर फुड एक्ट बाईलाज                  25 लाख
हुडा सेक्टर से विस्तार शुल्क              7.25 करोड़
कमर्शियल स्थलों से लाइसेंस फीस        1.95 करोड़

नोट-यह आंकड़े  वित्तीय वर्ष 2008-2009 के हैं।        
------------------------------
रिकवरी तेज करने के दिए आदेश

निगमायुक्त सीआर राणा के ने बकाया टैक्सों की रिकवरी करने के आदेश दिए हैं। जेडटीओ को इस काम में जुट दिया गया है। नगर निगम सचिव प्रताप सिंह को इसकी कमान सौंपी है। बकाया टैक्सों की समीक्षा के लिए रिपोर्ट मांगी जा रही है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: निगम को लगाया जा रहा है पलीता