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जंगल के दावेदारों को मिलेगा अधिकार, सूबे में वनाधिकार कानून लागू करने की प्रक्रिया शुरू

बिहार में वनाधिकार कानून के लागू होने से जंगल की जमीन पर परंपरागत रूप से खेती करने वाले लगभग पंद्रह हजार परिवार को खेती करने का अधिकार मिल जाएगा। समझ जाता है कि नीतीश सरकार ने इस कानून को जमीन पर उतारने की प्राथमिक स्तर की कार्यवाही शुरू कर दी है।

बिहार में वनाधिकार कानून लागू करने के लिए पंचायत राज कानून में संशोधन करना होगा। बिहार से झारखंड के अलग होने के बाद जंगल और पहाड़ नहीं रहे। राज्य में वन सिर्फ 6.22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रह गए हैं। जो वन हैं वह भी समाप्ति के कगार पर हैं।

कुछ जिलों में जैसे- रोहतास, औरंगाबाद, गया, नवादा, पूर्वी और पश्चिम चंपारण, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, मुंगेर, जमुई आदि जिलों में जंगल की जमीन है, जहां लोग खेती करते हैं। ऐसे परिवारों को वनाधिकार कानून का सीधा लाभ मिलेगा। सरकार बाशिंदों को दावा-फार्म मुहैया कराएगी।

जमीन जोतने-बोने के दावेदारों के फार्म ग्राम समितियां मुहर लगाएंगी। यह कानून सिर्फ आदिवासियों के लिए नहीं है, बल्कि वन क्षेत्र में रहने वाले सभी निवासियों के लिए है। माना जता है कि सरकार को इस कानून को लागू करने से राजनैतिक लाभ भी मिलेगा। साथ ही इस कानून के लागू होने के बाद सामुदायिक प्रयास से जंगल हरे-भरे होंगे।

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  • Web Title:जंगल के दावेदारों को मिलेगा अधिकार