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साम्यवादी हिंसा का सामाजिक सच

हिंसा कभी किसी सामाजिक समस्या का हल नहीं बनी। साम्यवाद ने इस ध्रुव सत्य को कभी नहीं समझा। भारत में सत्तर के दशक में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी में साम्यवादी हिंसा का जो प्रारंभ हुआ, उसने भारत में कितनी नरबलि ली है, इसकी अभी तक औपचारिक गणना नहीं हुई। लेकिन विश्व में फ्रांस के पेरिस में स्थित सुप्रसिद्ध राष्ट्रीय वैज्ञानिक शोध संस्थान ने सन् 1997 में अपनी पुस्तक ‘क्राइम टेरर, रिप्रेशन’ में साम्यवाद द्वारा मार डाले गए मनुष्यों की संख्या बताई है। सोवियत संघ में 2 करोड़, चीन में 6.5 करोड़, वियतनाम में दस लाख, उत्तरी कोरिया में बीस लाख, कम्बोडिया में 20 लाख, पूर्वी यूरोप में दस लाख, लैटिन अमेरिका में 1.5 लाख, अफ्रीका में 17 लाख, अफगानिस्तान में 15 लाख, सत्ता विहीन साम्यवादी आंदोलनों में 10 लाख, अब तक साम्यवादी आंदोलनों में 70-75 वर्षो में कुल 10 करोड़। इसमें भारत की संख्या नहीं है।
ओम प्रकाश त्रेहन, मुखर्जी नगर, दिल्ली

आओ रिहर्सल करें
सन 2010 में राष्ट्र मंडल खेल होने हैं जनता को पानी-बिजली और यातायात का खेल खेलने के लिए अभी से रिहर्सल कर लेनी चाहिए। अभी से दिल्ली में आपूर्ति का बुरा हाल है। इन्द्रलोक के अंदर सारा-सारा दिन-रात पानी की एक बूंद तक कई-कई बार नहीं आई है। जब राष्ट्रमंडल खेल होंगे तब मेहमानों की मेहमाननवाजी होगी न कि जनता की मजबूरी की। अभी से इसकी रिहर्सल कर ली जाए तो बेहतर होगा।
गुप्ता दाड़ी वाला, इन्द्रलोक, दिल्ली

पंचों का तुगलकी फरमान
पिछले कुछ वर्षो में पंचायतों के कुछ तुगलकी फरमान देखने-सुनने को मिले हैं। प्रेमी जोड़ों का सरेआम कत्ल करवाना, उन के परिवारों को प्रताड़ित करना आम आत हो गई है। देवबंद के फुलासी गांव की पंचायत का यह फरमान कि कोई भी (मुस्लिम) महिला बिना किसी मर्द को साथ लिए गांव से बाहर नहीं ज सकती- एक निहायत ही घटिया फरमान है- माना कि इसके पीछे उनकी सोच अच्छी हो सकती है। इसी प्रकार दूसरी पंचायत द्वारा एक लड़के का एक लड़की के साथ गांव से भाग जाना भी उन्हें अखरा और उन्होंने उस लड़के की बहन को गिरवी रखवा दिया। ठीक लिखा आपने कि भाई की सजा बहन को क्यों? ऐसे पंचों को कड़ा दंड दिया जाना चाहिए।
इन्द्र सिंह धिगान, दिल्ली

गम और हम
न हंसी न खुशी
सिर्फ गम,
गूंजती किलकारियां
दो से तीन
हो गए हम।
शरद जयसवाल, कटनी, मध्य प्रदेश

मंदी का नतीज नस्ली हमले
आस्ट्रेलिया में जारी भारतीयों पर नस्ली हमले वैश्विक मंदी का नतीजा हैं।  आस्ट्रेलियाई युवाओं को लगता है कि उनके देश की नौकरियों पर भारतीय कब्जा करते जा रहे हैं। हमले के शिकार भारतीयों का आरोप है कि प्रशासन उन पर हमला करने वालों से नरमी से पेश आ रहा है। सरकार को नस्ली हिंसा में लिप्त नागरिकों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। 
जोगिंदर सिंह, मोहाली

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