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सेना के पूर्व अधिकारियों की नियुक्तियों में एजूकेशन हब आगे

देश की सुरक्षा के लिए सीमा पर चट्टान की तरह खड़े रहकर दुश्मनों से मोर्चा लेने वाले सैन्य अधिकारी अब एजूकेशन हब की कमान संभाल रहे हैं। आलम यह है कि शहर के ज्यादातर तकनीकी व प्रबंधन शिक्षण संस्थानों में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रशासनिक नियम, अनुशासन व समयबद्धता के साथ टीम को दिशा निर्देश दे रहे हैं।

शिक्षण संस्थान प्रबंधन की माने तो सेना के पूर्व अधिकारी नियम व अनुशासन सहित कई मायनों में उपयुक्त होते है। सेना के पूर्व अधिकारियों को उनके प्रोफेशनल एक्सपीरियन्स के चलते प्रशासनिक कार्यो के बारे में कुछ अलग से बताना नहीं पड़ता है। इसके अलावा सेना के पूर्व अधिकारियों का अनुशासन और उनकी समयबद्धता उन्हें प्रशासनिक पद के दूसरे अधिकारियों से आगे और अलग रखती है। सेक्टर-62 स्थित जेएसएस, जयपुरिया व केआईईटी जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ लैडर्स जैसे प्री स्कूल भी चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर के पद पर सेना के पूर्व अधिकारियों की ही नियुक्तियां कर रहे हैं। सेना के अधिकारियों के लिए ये उनके जीवन की दूसरी पारी से कम नही होता है। तकनीकी व प्रबंधन शिक्षण संस्थानों में यह प्रशासनिक अधिकारी केवल काम ही नहीं करते हैं, बल्कि अपने काम को इंज्वाय भी करते हैं।


क्या कहते हैं अधिकारी जयपुरिया इंस्टीट्यूट के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी विनोद कुमार तोमर ने बताया की सेना के अधिकारी पहले ही भारत के कई राज्य घूम चुके होते हैं। जिससे उनके लिए कॉलेजों में काम करना काफी आसान हो जाता है। विभिन्न राज्यों को घूमने के चलते विभिन्न प्रदेशों से शिक्षा ग्रहण करने के लिए यहां पर आने वाले छात्रों को समझाना आसान हो जाता है। उन्होंने बताया कि अच्छी शिक्षा के साथ-साथ नियम व अनुशासन भी जरूरी होता है। इसलिए पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए। कोर्स के दौरान छात्र शिक्षण संस्थान में दोनों ही बातों को बाखूबी सीखकर अपना मकाम बना लेते हैं।

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