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भारतीयों की हिफाजत के कड़े उपाय के निर्देश

भारतीयों की हिफाजत के कड़े उपाय के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर लगातार हो रहे हमलों पर सोमवार को चिंता जताई। उसने सरकार को निर्देश दिया कि वह दो हफ्तों के भीतर व्यापक हलफनामा दायर कर बताये कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं।

न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और न्यायमूर्ति एके गांगुली की पीठ ने कहा कि आस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा और संरक्षा सर्वोपरि है। पीठ ने कहा कि हम आश्वस्त हैं कि सरकार निश्चित तौर पर सभी तरह के कदम उठा रही होगी लेकिन हमारी चिंता है कि सरकार की ओर से भरपूर प्रयासों के बावजूद हमले की घटनाएं जारी हैं। अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब अटार्नी जनरल जीई वाहनवती ने पीठ को केंद्र की ओर से इस संबंध में पहले ही उठाए जा चुके कदमों के बारे में जानकारी दी।

केंद्र को दो हफ्तों के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए पीठ ने कहा कि सरकार सारी सूचनाएं वेबसाइट पर मुहैया कराये क्योंकि आस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय छात्रों के अभिभावकों, रिश्तेदारों और उनके मित्रों को देश की स्थिति के बारे में सही-सही जानकारी हासिल करने का अधिकार है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हलफनामा की सामग्री और दिशा-निर्देशों को आस्ट्रेलिया में भारतीय उच्चायोग की वेबसाइट के अतिरिक्त विदेश मंत्रालय तथा प्रवासी मामलों की वेबसाइट पर मुहैया कराया जाना चाहिए ताकि छात्रों के माता-पिता और रिश्तेदारों को वहां की स्थिति की ठीक-ठीक जानकारी मिल सके।

इससे पहले, एक जनहित याचिका पर न्यायालय की ओर से जारी नोटिस का जवाब देते हुए केंद्र ने कहा था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खुद गत 29 मई को अपने आस्ट्रेलियाई समकक्ष केविन रड के समक्ष इस मुददे को उठाया। उस याचिका में आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हमले के मामले से निपटने में सरकार पर निष्क्रिय रहने का आरोप लगाया गया था। उसने न्यायालय को यह भी सूचित किया था कि आस्ट्रेलियाई सरकार अपने मौजूदा कानूनों में संशोधन की संभावना तलाश रही है ताकि नस्लवाद से जुड़े अपराधों के लिए सजा बढ़ाई जा सके। उसने कहा था कि कैनबरा में भारतीय उच्चायुक्त और सिडनी तथा मेलबर्न में भारतीय महावाणिज्य दूत न सिर्फ आस्ट्रेलियाई अधिकारियों बल्कि भारतीय छात्रों और समुदाय के भी संपर्क में हैं।

सरकार ने न्यायालय को सूचित किया था कि आस्ट्रेलियाई अधिकारियों की ओर से एक कार्यबल का गठन किया जा रहा है जो नस्ली हमले से जुड़े मुददे पर देश के विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने की कोशिश करेगी। याचिकाकर्ता की ओर से उपस्थित अधिवक्ता डीके गर्ग ने कहा कि यद्यपि सरकार भारतीय छात्रों की रक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाने पर जोर दे रही है लेकिन छात्रों के चिंतित माता-पिता अपने बच्चों की खैरियत जानने के लिए लगातार पूछताछ कर रहे हैं। याचिका के अनुसार फिलहाल आस्ट्रेलिया में करीब 97 हजार भारतीय छात्र अध्ययन कर रहे हैं।

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