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क्लाउड सीडिंग

क्लाउड सीडिंग मौसम में बदलाव लाने की ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बादलों से इच्छानुसार वर्षा कराई जा सकती है। इसमें हवा में कुछ ऐसे तत्व छोड़े जाते हैं जो बादलों में जाकर उसकी माइक्रोफिजिकल प्रक्रिया में परिवर्तन करता है।

आमतौर पर क्लाउड सीडिंग प्रक्रिया में सिल्वर आयोडाइड और ड्राई आइस जैसे तत्व इस्तेमाल किए जाते हैं। सीडिंग के लिए जरूरी है कि बादलों में जीरो डिग्री से कम का जल तरल अवस्था में मौजूद हो। सिल्वर आयोडाइड जैसे तत्व जो बर्फ जैसा होता है, जमे हुए न्यूक्लिएशन को पिघालता है। ड्राई आइस हवा को इतना ठंडा कर देती है वाष्प क्रिया से बर्फ स्वत: बदल देता है।

मध्यम ऊंचाई के बादलों में सामान्य सीडिंग योजना में समान वाष्प प्रक्रिया का दबाव पानी की बजाय जल पर कम होता है। जब बर्फ के टुकड़े बेहद ठंडे बादलों का निर्माण करते हैं तब बर्फ के टुकड़े तरल बूंदों में तब्दील हो जाते हैं। यदि उनकी बढ़ोतरी अधिक होती है तो यह टुकड़े बर्फ के रूप में ही उन बादलों से भी गिर पड़ते हैं जिनसे पानी नहीं गिरता। इस प्रक्रिया को ‘स्टेटिक’ सीडिंग कहा जाता है।

गर्म मौसम के बादलों की सीडिंग को ‘डायनेमिक’ सीडिंग कहते हैं। इसमें छोड़ी गई फ्रीजिंग की अंतर्निहित ऊष्मा का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया में माना जाता है कि अतिरिक्त ऊष्मा चुने गए बादलों की प्लवनशीलता को अधिकाधिक बढ़ावा देती है।

क्लाउड सीडिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रसायनों का हवाई जहाज के जरिए भी बादलों पर छिड़काव किया जाता है। इसके अतिरिक्त पृथ्वी से जनरेटरों या एंटी-एयरक्राफ्ट बंदूकों या रॉकेटों से बादलों में छोड़ा जाता है। हवाई जहाज से छोड़ने पर सिल्वर आयोडाइड  को जलती हुई अवस्था में बादलों पर फैलाया जाता है।

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