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स्पेशल ट्रेनों से मोह भंग, लेट होने से यात्री परेशान

समर सीजन में भले ही रेलवे ने स्पेशल ट्रेन चलाकर यात्रियों को लुभाने के प्रयास किया हो लेकिन इन ट्रेनों में यात्रा करने का अनुभव यात्रियों के रोंगटे खड़े कर देते हैं। ट्रेन चलती तो अक्सर ठीक समय से हैं लेकिन पहुंचने का कोई समय निर्धारित नहीं होता। इन दिनों समर स्पेशल ट्रेन पांच से साथ घंटे की देरी से स्टेशन पहुंच रही है। पानी व खाने के अभाव में इन ट्रेनों में यात्रा करना किसी कडुवे अनुभव से कम नहीं है।


इलाहाबाद से चलकर गाजियाबाद दिल्ली से रास्ते चंढीगढ़ जाने वाली 0483 स्पेशल ट्रेन पांच घंटे की देरी से स्टेशन पहुंची। ट्रेन में सफर करने वाले यात्री नवनीत के मुताबिक इस ट्रेन को रास्तेभर कही भी रोक दिया जाता। उसके बाद मेल व एक्सप्रेस रूटीन ट्रेनों को पास कराया जता। ट्रेन में कोई पानी या खाना बेचने के लिए वेंडर तक नहीं आया। यहां तक कि ट्रेन को अक्सर स्टेशन के आउटर में रोक दिया गया जहां खाने पीने की कोई व्यवस्था नहीं रहती। स्टॉपेज कम होने के कारण केवल कुछ ही स्टेशन पर इसको रोका गया। इतनी ही नहीं ट्रेन में किसी स्टेशन पर पानी तक नहीं भरा गया। जिसके कारण ट्रेन की टायलेट्स में पानी तक समाप्त हो गया। नवनीत को दस बजे तक अपने आफिस पहुंचना था लेकिन ट्रेन के साढ़े 11 बजे आने के कारण वह 12 बजे आफिस पहुंच सके।
यह आलम केवल एख ट्रेन का नहीं बल्कि सभी स्पेशल ट्रेनों का है। यहीं कारण है कि रेलवे प्रशासन को इन ट्रेनों में सीटों को लेकर विज्ञापन तक निकालने पड़ रहे हैं। जबकि रूटीन ट्रेनों में सीटों को लेकर हाउस फुल हैं। एक बार स्पेशल ट्रेन में यात्रा करने के बाद अक्सर यात्री इन ट्रेनों में यात्रा करने से तौबा कर रहे हैं।

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