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मम्मी डैडी चाहते हैं बच्चों को मिले सेक्स शिक्षा

यूपी में अभिभावक चाहते हैं कि उनके बच्चों को स्कूलों में सेक्स एजुकेशन मिले ताकि वह सेक्स से जुड़ी भ्रान्तियों और विसंगतियों के प्रति सचेत रहें। वह चाहते हैं सेक्स शिक्षा के पाठच्यक्रम में विपरीत लिंग के आकर्षण को सहज भाव से समझया जाए। वह बच्चों को सेक्स की शिक्षा के साथ ब्रह्मचर्य की शिक्षा भी दिलाना चाहते। लेकिन उनकी शर्त यह है कि लड़के-लड़कियों की सेक्स शिक्षा की कक्षाएँ एक न हों।

सेक्स शिक्षा के नए पाठच्यक्रम को तैयार करने से पहले डा. लक्ष्मी प्रसाद पांडे की अध्यक्षता में बनी विशेषज्ञों की कमेटी ने लखनऊ, वाराणसी, इलाहाबाद समेत कई जिलों में अभिभावकों का सर्वे कराया है। इस सर्वे में डाक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, गृहणी, शिक्षक, प्राचार्य, प्रशासनिक अधिकारी, वकील, मेडिकल अफसर व कृषि आदि से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है।

50 सवालों के प्रश्न बैंक में अस्सी फीसदी लोगों की राय है कि स्कूलों में सेक्स शिक्षा जरूरी है लेकिन पाठच्यक्रम तैयार करते वक्त बच्चों की उम्र और उनके मनोविज्ञान का ख्याल रखा जाना जरूरी है। सबकी राय है कि बच्चों से पहले इस बारे में अभिभावकों को जागरुक करना जरूरी है। उनके लिए एक ब्रोशर तैयार किया जए जिससे वह भी पाठच्यक्रम की महत्ता समझ सकें।

अभिभावक चाहते हैं कि बच्चों को उम्र के साथ होने वाले शारीरिक बदलावों और उससे पैदा होने वाले तनावों के बारे में जनकारी दी जाए। ताकि उनमें गलत प्रवृत्तियाँ पैदा न हों। यौनावस्था में विपरीत लिंग के प्रति होने वाले आकर्षण के बारे में बताया जाए। इन बातों पर बच्चे अक्सर अपने माँ-बाप से चर्चा नहीं करते।  

अभिभावक चाहते हैं कि बच्चों को यौन जनित रोगों के साथ स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की जानकारी मिले। स्वास्थ्य शिक्षा के साथ-साथ उन्हें ब्रह्मचर्य की शिक्षा भी दी जाए। उन्हें व्यायाम, प्राणायाम व योग के जरिए शरीर के विभिन्न रोगों को ठीक करने की जानकारी दी जाए।

सर्वे में 60 फीसदी अभिभावक चाहते हैं कि लड़कों को पुरुष अध्यापक व लड़कियों को महिला अध्यापिकाएँ सेक्स शिक्षा दें। सह-शिक्षा के स्कूलों में छात्र व छात्राओं की सेक्स शिक्षा की कक्षाएँ अलग-अलग लगें। सेक्स शिक्षा देने वाले शिक्षकों को अलग से प्रशिक्षित किया जाए। सेक्स शिक्षा के बारे में बच्चों से समय-समय पर फीडबैक लिया जाए ताकि उनके भटकाव रोका जा सके।

एक सुझाव यह भी आया कि स्कूल में एक बाक्स रखा जाए जिसमें बच्चे अपना नाम बताए बिना अपनी समस्याएँ लिखकर डाल सकें। इस समस्याओं का समाधान कक्षा या प्रार्थना सभा में परामर्श के माध्यम से किया जाए।
कमेटी के संयोजक डा. एलपी पांडे ने बताया कि सेक्स शिक्षा के पाठच्यक्रम में इन सभी बातों का समावेश किया जाएगा।

विशेषज्ञों की यह कमेटी नए  पाठच्यक्रम के साथ अपनी रिपोर्ट विधान परिषद की उच्चस्तरीय कमेटी के सामने रखेंगी। उच्चस्तरीय कमेटी की मंजूरी के बाद ही यौन शिक्षा के नए पाठच्यक्रम को स्कूली किताबों में शामिल किया जाएगा।

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