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12 महीने से नहीं मिला वेतन, कोर्ट की तैयारी

डाक्टर भी बंधुआ मजदूर हो गये है! यह कोई और नहीं बल्कि सूबे के डाक्टर ही कह रहे हैं। कांट्रेक्ट पर बहाल सूबे के डाक्टरों को महीनों से वेतन नहीं मिल रहा है। स्थिति यह है कि कांट्रेक्ट खत्म हो जाने के बाद डाक्टर दोबारा काम करने को तैयार नहीं पर सरकार उनसे काम लेने को तैयार है।

सारण जिले के 38 कांट्रेक्ट डॉक्टर तो अब कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि पहले वेतन लेंगे और तब सरकारी अस्पतालों में दोबारा काम करने को तैयार होंगे। पूरे सूबे में सरकार अब तक 1763 कांट्रेक्ट डाक्टरों को बहाल कर चुकी है। पर वेतन नहीं मिलने के कारण कितने डाक्टर काम कर रहे हैं और कितने छोड़ चुके हैं यह बताना सरकार के लिए भी मुश्किल है।

जिस जिले के सिविल सर्जन मैनेजर की रोल में हैं वे अनुनय-विनय कर स्थानीय स्तर पर डाक्टरों से काम करवा रहे हैं। पर जहां के सिविल सर्जन सरकारी नियम कानून में बंधे रहने के आदी है वहां कांट्रेक्ट डाक्टरों की शामत है। पटना मुख्यालय से उनके वेतन की राशि का आवंटन समय पर नहीं होता और सिविल सर्जन वेतन देने के मामले पर अपने हाथ खड़े कर लेते हैं।

इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री नन्दकिशोर यादव ने कहा कि तुरंत ही आवंटन भेजा गया है। इसकी जांच की जा रही है कि वेतन की राशि के आवंटन में देरी क्यों की जाती है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आगे से वेतन हर महीने मिले। सारण कांट्रेक्ट डाक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीनिवास सिंह ने बताया कि 12 महीने से पूरे जिले के 38 डाक्टरों को वेतन नहीं मिला है।

6 जून को कांट्रेक्ट अवधि समाप्त होने के बाद अब दोबारा डाक्टर सरकारी अस्पताल में काम करने को तैयार नहीं है। शीघ्र ही वेतन के लिए कोर्ट की शरण लेंगे। उधर बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ के संयोजक डा. अजय कुमार और संयुक्त सचिव कुमार अरुण ने कहा कि सरकार कांट्रेक्ट डाक्टरों को बंधुआ मजदूर समझ रही है। काम करवा लेती है पर वेतन देने में उसे परेशानी होती है।

पूरे सूबे में किसी जिले में छह महीने से वेतन नहीं मिल रहा है तो कहीं चार या दो महीने से। इस संदर्भ में भासा स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव से कई बार मिलकर गुहार लगा चुका है पर कार्रवाई नदारद है। तीन साल से कांट्रेक्ट सिस्टम चल रहा है पर एक बार भी इन डाक्टरों का वेतन पुनरीक्षण नहीं हुआ।

भासा आग्रह कर चुका है कि छठे वेतनमान के आलोक में कांट्रेक्ट डाक्टरों का वेतनमान 20 हजार से बढ़ाकर 40 हजार किया जाए। उनकी सेवा नियमित की जाए और मानदेय का भुगतान समय पर किया जाए।

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  • Web Title:डाक्टर भी बंधुआ मजदूर!