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पूर्व मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्टों में शामिल रही नानघाट पेयजल योजना, योजना के स्त्रोत पर बना बीएफजी में हुआ रिसाव

पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडुड़ी के ड्रीम प्रोजेक्टों में शामिल पौड़ी नगर के लिए बनाई ज रही बहुचर्चित नानघाट पेयजल योजना पूरा करने के लिये विभाग द्वारा दिसम्बर 2010 का समय तो दिया जा रहा है परंतु कार्य की गति को देखते हुये इस योजना के फिलहाल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है। इस योजना में प्रयुक्त होने वाले डेक्टाईन आयरन (डीआई) पाइप अभी केवल दो किलोमीटर तक ही डाले जा सके है। विभागीय अभियंता भी दबी जुवान में इस योजना के समय पर पूरा होने के बारे में संदेह जताते है।

जिला मुख्यालय पौड़ी के लिये बनाई जा रही इस बहुचर्चित पेयजल योजना में पहली बार ईआरडब्लू पाइप के साथ डेक्टाईन आयरन पाईप का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। इस योजना के लिये इस डीआई पाईप की सप्लाई कलकत्ता की एक फर्म कर रही है। इन पाईपों की ज्वांईटिग के लिये इस फर्म के इंजीनियर यहां आये थे, लेकिन विभाग द्वारा केवल दो किलोमीटर ही पाईप लाईन बिछाये जाने के कारण फर्म के अभियंता अपनी निगरानी में डीआई पाईपों की ज्वांईटिग नहीं करवा पाये इन अभियंताओं ने पेयजल निगम के कुछ अभियंताओं को ज्वांईटिग प्रक्रिया समझ कर जाना ही उचित समझ।

इस योजना में लगभग 58 किलोमीटर डीआई पाईप बिछाया जाना है। विभाग योजना के शुरु होने के तीन वर्ष में अब तक केवल दो किलोमीटर ही डीआई पाइप बिछा पाया है। हांलाकि विभाग का दावा है कि शीघ्र ही योजना के पानी को टीला टैंक तक पानी पंहुचा दिया जायेगा। विभाग के आला अधिकारी इस योजना में 14 किलोमीटर तक पानी पंहुचने की बात पिछले वर्ष से कह रहे है लेकिन हकीकत कुछ और ही है।

पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी के ड्रीम प्रोजेक्टों में शामिल नानघाट पेयजल योजना की स्वयं खंडूरी प्रत्येक तीन माह में समीक्षा किया करते थे। इस समीक्षा में भी अधिकारियों द्वारा सीएम को 14 से 18 किलोमीटर तक पंहुचने की बात कही जाती रही जबकि जमीनी हकीकत में पानी योजना में इस्तेमाल ईआरडब्लू पाइपों के जरिये केवल सात किलोमीटर तक ही पंहुच पाया है।

उधर योजना में स्त्रोत पर बनाई गई बीएफजी के भी लीक करने की बात सामने आयी है इस लीकेज के कारण पाईप लाईनों में तीन इंच से भी कम पानी पंहुच पा रहा है जबकि इस योजना में 300एमएम ब्यास के पाईपों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

विभाग के अभियंता का कहना है कि योजना में दो किलोमीटर डीआई पाईप में भी पानी को चला कर टेस्ट कर दिया गया है। उनका कहना था कि दो किलोमीटर लाईन और पड़ जाने के बाद नानघाट के पानी को टीला में बने पानी के टैंक तक पंहुचा दिया जायेगा।

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  • Web Title:2010 तक भी नहीं बन पायेगी नानघाट पेयजल योजना