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शादी.... तलाक..... फिर उसी के शाथ

शादी.... तलाक..... फिर उसी के शाथ

क्या हुआ तेरा वादा.. अपने आसपास हमें ऐसे कुछ किरदार मिल जाएंगे जिन्होंने साथ जीने-मरने की कस्में खाईं.. और हमेशा के लिए एक-दूसरे का होने का फैसला किया। लेकिन शादी के चंद सालों बाद ही ‘तेरे बिना नहीं रह सकते’ यह संवाद बदलकर ‘तेरे साथ नहीं रह सकते’ हो गया। कुछ अलग हो जाते हैं तो कुछ एक कदम आगे बढ़कर कानूनन तलाक भी ले लेते हैं। और उसके बाद का दौर याद दिलाता है उस साथी की खूबियां, जिससे अलग हुए थे। जब गलती समझ में आती है, तब तक हालात इतने बदल चुके होते हैं कि उसे सुधारने का मौका नहीं रहता।

बॉलिवुड की एक और सेलिब्रिटी सात फेरों के बंधन में बंध गए। निर्माता निर्देशक संजय गुप्ता ने पिछले दिनों एक सादे समारोह में शादी रचा ली। संजय गुप्ता के नाम से वे लोग अच्छी तरह से वाकिफ होंगे जो ऐक्शन थ्रिलर्स के शौकीन हैं। और रोमांच के शौकीन इस फिल्मकार ने असल जिंदगी में भी एक अनोखे थ्रिल को अंजाम दिया। उन्होंने पांच साल पहले अपनी जिस पत्नी अनु लेखी को तलाक दिया था, उसी से दोबारा शादी कर ली ‘आप इसे रोमांच नहीं, रोमांस कहिए। संजय गुप्ता के खास दोस्त और टीवी फिल्म ऐक्टर रोहित राय कहते हैं। अपनी बीवी से दोबारा शादी करने का मतलब यही है कि आप उससे कितना प्यार करते हैं। असल जिंदगी में ऐसी फिल्मी स्टोरी कब देखने को मिलती है?’

ऐसी फिल्मी स्टोरी फिर हकीकत के परदे पर नजर आएगी। वह भी हॉलिवुड में। पॉप गायिका पिंक अपने मोटोरेसर पति कैरी हार्ट से एक बार फिर शादी रचाएंगी। पिछले साल वे दोनों अलग हुए थे। दोनों ने चार साल तक डेटिंग करने के बाद 2006 में शादी की थी लेकिन यह रिश्ता वे दो साल से ज्यादा नहीं निभा पाए। 2008 में दोनों अलग हुए लेकिन यह जुदाई बहुत दिनों तक नहीं सह पाए। पिछले ही महीने पिंक ने एक पत्रिका को दिए अपने इंटरव्यू में कहा- ‘हमारे बीच रिश्ता दरअसल कभी खत्म ही नहीं हुआ था। हमें यह समझने के लिए वक्त चाहिए था कि हम एक दूसरे के बिना अधूरे हैं।’ हार्ट के ऑस्ट्रेलियाई दौरे के बाद दोनों शादी कर लेंगे।

‘अपने पति या पत्नी से दोबारा शादी का फैसला करना आसान नहीं। चूंकि आप पहले किसी न किसी कारण से अलग हुए थे। उस कारण को पूरी तरह से भूल जाना और नए सिरे से सब कुछ शुरू करना बहुत मुश्किल होता है। इस बार आपको ज्यादा प्रतिबद्धता दिखानी होती है। वह सब कुछ भी करना पड़ता है, जिसे करने से पहले आप झिझकते हों।’ अपोलो के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. संदीप वोरा कहते हैं। संजय गुप्ता ने वह सब किया। उनके खास दोस्त ने बताया कि शादी से पहले संजय ने अपने सेलफोन से अपनी सभी महिला मित्रों के नंबर डिलीट कर दिए। इसके बाद उन्होंने अनु को अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट दिखाई, ताकि बता सकें कि वह उनके प्रति समर्पित हैं। अनु से संजय ने 1997 में शादी की थी, लेकिन पांच साल बाद उनका तलाक हो गया। इसके बाद अनु पुणे में अपने माता-पिता के पास रहने चली गईं। संजय कहते हैं, ‘इसके बाद मेरी जिंदगी खाली सी हो गई। मैं अनु को मिस करता रहा। पिछले छह महीनों से मैं पूरी कोशिश कर रहा हूं कि अनु मेरी जिंदगी में वापस आ जाए। मेरी मां के गुजरने के बाद अनु ने ही मुझे सहारा दिया।’

जिदगी के सबसे स्याह दिन थे वे

अलीगढ़ की शाहीन के लिए यह सब इतना आसान नहीं था। कमाल ने उसे तलाक देने के समय कुछ नहीं सोचा था। धर्म ऐसी इजाजत भी नहीं देता लेकिन उन तीन लफ्जों के बाद शाहीन के लिए कुछ नहीं बचता था। सिर्फ एक शक के बिना पर कमाल ने उसे छोड़ दिया था। लेकिन जब शक दूर हुआ तो कमाल ने अपनी गलती कबूल कर ली। शाहीन के साथ दोबारा निकाह किया। शाहीन याद करती है, ‘वे दो साल मेरी जिंदगी के स्याह दिन थे। हां, इसके बाद कमाल ने मेरी जिंदगी बदल दी। अब वह न तो मेरे फोन चेक करता है और न ही ईमेल। कहता है, अगर तुम सचमुच बेवफा हुईं तो भी मैं कभी तुम पर शक नहीं करूंगा।’ कमाल की दोबारा शादी करवाने में रिलेशनशिप काउंसिलर अहमद खान की बड़ी भूमिका थी। कमाल अहमद के पास अपनी काउंसिलिंग के लिए जाता था। उन्होंने ही कमाल को समझाया कि शक का कोई इलाज नहीं। इसके बाद शाहीन को भी सिटिंग्स के लिए बुलाया। 2005 में अलग हुए शाहीन और कमाल ने 2007 में दोबारा शादी की और सबसे खूबसूरत बात यह हुई कि उनकी बच्ची आलिया को अब माता-पिता, दोनों का प्यार मिल रहा है। बकौल शाहीन अब वह कहता है, अगर तुम सचमुच बेवफा हुईं तो भी मैं कभी तुम पर शक नहीं करूंगा।

बच्चे ने मिलाया

‘हमारे बच्चे ने ही हमें फिर एक किया है।’ बेन कहते हैं। नार्वे के मूल निवासी बेन ने चार साल पहले अमेरिकन लिंडा से शादी की और काम के सिलसिले में भारत आकर बस गए। उनके बच्चे नहीं थे इसलिए दोनों ने एक महीने के बच्चे को गोद लिया। लेकिन शादी के तीन साल बाद ही दोनों के बीच अलगाव हुआ। 2007 में दोनों अलग हो गए। बच्चा लिंडा के पास रह गया। लेकिन तीन महीने बाद ही बेन को उन दोनों की कमी खलने लगी। दोनों के बीच तलाक की नौबत नहीं आई थी इसलिए उन्हें दोबारा शादी करने की जरूरत नहीं थी। छह महीने बाद दोनों फिर एक हो गए। लिंडा कहती हैं, ‘बेन ने मुझे दोबारा रिझाने के लिए वह सब किया जो वह पहले किया करता था। मैरिज काउंसिलर लीना सिंह कहती हैं, ‘अक्सर तलाक की स्थिति में सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे ही होते हैं और यह भी सच है कि बच्चे ही कई बार ऐसी स्थितियों में माता-पिता को एक करते हैं।  कई मामलों में माता-पिता या दोस्तों की बहुत बड़ी भूमिका होती है। गौरांग और मिली के साथ ऐसा ही हुआ।

अब.. जो तुमको हो पसंद

संजय गुप्ता अपनी पत्नी अनु के लिए खंडाला में एक रिसॉर्ट बनवा रहे हैं। जुलाई के आखिर तक वह पूरा हो जाएगा। ‘वह पैसे वाले हैं, जो करेंगे, वह हिट हो जाएगा। लेकिन मैंने अपने पति के लिए घर में दस किस्म की चिडि़यां पाली हैं।’ इलाहाबाद की वत्सल कहती हैं, ‘पहले मैं अपने पति की इस आदत से बहुत चिढ़ती थी कि वह चिडि़यों को सुबह शाम दाना क्यों डालते हैं। वह सड़कछाप कुत्तों को खाना क्यों खिलाते हैं। बिल्लियों के लिए दूध क्यों रखते हैं।’ वत्सल और उनके पति अशोक शर्मा के बीच तलाक छह साल पहले हुआ था। अशोक को यह पसंद नहीं था कि वत्सल के मायके वाले कभी उनके घर आएं। अपने घर वालों से भी अशोक की नहीं बनती थी। इसलिए वह वत्सल पर इस बात का दबाव बनाता था कि वह भी अपने मायके वालों से ज्यादा मतलब न रखे।  

इसी बात पर दोनों शादी के तीन साल बाद अलग हो गए। यह अलगाव पांच साल तक चला। पर इस बीच अशोक को यह अहसास हो गया कि वह गलत था। अकेलापन उसे खाने लगा था। फिर पिछले साल उसने वत्सल से दोबारा शादी कर ली।वत्सल कहती है, ‘मैं पहले तैयार नहीं थी। मुझे डर लगता था कि फिर वही सब शुरू हो जाएगा। लेकिन मेरे माता-पिता ने मुङो समझाया। इसके बाद मैं राजी हुई।’ इसके बाद वत्सल ने भी अशोक की पसंद का ख्याल रखना शुरू किया। अशोक को जानवरों से प्यार था तो वत्सल ने भी अपने व्यवहार में बदलाव किया।


दुख ने दिखाई राह

अपने व्यवहार में आकांक्षा मेहता ने भी बदलाव किया और अब वह दूसरों की भी मदद कर रही हैं। इंदौर की आकांक्षा की पांच साल की शादी 2006 में टूटी थी। किन कारणों से, वह यह तो नहीं बतातीं लेकिन इतना जरूर कहती हैं कि इससे वह बुरी तरह टूट गई थीं। यहां तक कि उन्हें डिप्रेशन का इलाज तक करवाना पड़ा। डेढ़ साल बाद उनके पति सौमिन मेहता को अपनी गलती का अहसास हुआ और वह आकांक्षा के पास वापस लौट आए। इसके बाद आकांक्षा ने एक संस्था अभिमानिनी की शुरुआत की। इसके जरिए वह तलाकशुदा और बेसहारा महिलाओं की मदद करती हैं।आकांक्षा कहती हैं, ‘दोबारा उसी व्यक्ति से शादी करने के मेरे फैसले का बहुत विरोध हुआ। मेरे घर वालों ने मुझसे अपना रिश्ता खत्म कर लिया। पर मैं खुश हूं। सौमिन अब पहले जैसे नहीं। मैं भी अपने काम से खुश हूं।’

शुक्र है हमने गलती सुधार ली

मैरिज काउंसिलर लीना सिंह, गौरांग और मिली के केस के बारे में बताती हैं। ‘मुंबई के सॉफ्टवेयर इंजीनियर गौरांग देसाई की शादी एयर होस्टेस मिली से छह साल पहले हुई थी। दोनों एक साल तक तो ठीक-ठाक रहे लेकिन गौरांग की आदत अपने दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिताने की थी। मिली इससे इतनी परेशान हुई कि उसने गौरांग से अलग होने का फैसला कर लिया। इसके बाद उसके माता-पिता ने उसकी काउंसिलिंग करवाई। वे और गौरांग के खास दोस्त यह चाहते थे कि दोनों फिर से एक हो जाएं। गौरांग के दोस्तों ने मिली को समझाया, गौरांग को भी समझाया। तलाक हो जाने के बाद भी दोनों को जबरदस्ती मिलवाया। दोनों ने जब एक-दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताया तो उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ।’ लीना सिंह कहती हैं, ‘कई बार व्यग्रता से किया फैसला तलाक की नौबत ला सकता है। लेकिन अगर आप सारे पहलुओं पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि तलाक के बजाय समझदारी से काम लेना ही किसी रिश्ते की सबसे बड़ी जरूरत होती है।’

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  • Web Title:तुमसे अच्छा कोई नहीं..