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भाभी जी, पानी आ रहा है क्या, पानी न मिलने पर महिलाओं की सड़क पर उतरने की चेतावनी

सिगरा स्थित शास्त्रीनगर कालोनी में आजकल रतजगा चल रहा है। यह रतजगा किसी उत्सव का हिस्सा नहीं, बल्कि पानी का जुगाड़ करने के लिए किया ज रहा है। यहां पानी के लिए लोग पूरी रात जग रहे हैं। महिलाएं सड़क पर बाल्टी लेकर इस इंतजर में बैठी रहती हैं कि पानी कभी भी आ सकता है। यहां चार दिनों से पानी को लेकर हाहाकार मचा है, लेकिन जल संस्थान के अफसरों को कोई परवाह नहीं है।

यही हाल शास्त्रीनगर से सटे अशोकनगर व गांधीनगर आदि कालोनियों का भी है। पॉश कालोनियों में शुमार यहां के बाशिंदे पानी की बाल्टी लेकर नलों की ओर दौड़ते नजर आते हैं। पानी आपूर्ति कब होगी, कालोनी वालों को पता नहीं। शास्त्रीनगर में पानी के इंतजार में जाग रही महिलाएं रात में अचानक पड़ोसी से पूछ बैठती हैं- भाभी जी, पानी आ रहा है क्या? महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि पानी आपूर्ति का समय निर्धारित नहीं हुआ, तो वे सड़क पर उतरने को बाध्य होंगी।

दरअसल, इन कालोनियों में पानी आपूर्ति कस्तूरबा नगर स्थित टच्यूबवेल से की जाती है। लेकिन चार दिनों से कालोनी में पानी की आपूर्ति बाधित है। दिन हो या रात, पानी का अता-पता नहीं है। यदि टच्यूबवेल चला भी, तो रास्ते से पानी गायब हो ज रहा है। जल संस्थान के अधिकारी बिजली का रोना रो रहे हैं।

लेकिन उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं कि जब देर रात में बिजली रहती है, तो पानी सप्लाई क्यों नहीं होती? पांच सौ अवास वाले शास्त्रीनगर में चार दिनों से यह हालत है कि बूढ़े हों या बच्चे, हाथ में बाल्टी व जग लिए कड़ी धूप में निजी हैंडपम्प से पानी लाने के लिए विवश हैं। कालोनी में रहने वाली रीता जेटली की मानें, तो पांच दिन से फर्स्ट व सेंकेड फ्लोर की छोड़िए, ग्राउंड फ्लोर पर भी पानी नसीब नहीं हो रहा है।

कभी पानी आ भी गया, तो दस मिनट के लिए। रंजना सिंह कहती हैं, पानी आपूर्ति का समय तय होना चाहिए। यहां हालत यह है कि कब पानी आएगा, पता ही नहीं। पानी के इंतजर में पूरी रात जागना पड़ रहा है। स्वाति श्रीवास्तवा बिजली व पानी की व्यवस्था से काफी क्षुब्ध हैं।

बोलीं, आखिर कितना पानी ढोकर लाया जाए। नहाने, कपड़ा धोने को छोड़िए, पीने व खाना बनाने के लिए पानी मिलना मुश्किल है। सिमरन बोलीं, पहले तो पानी का समय निर्धारित था। अब न तो बिजली का समय तय है और न ही पानी का। मधु सिंह व ऊषा शर्मा का कहना है कि पानी के लिए पूरी रात जगना पड़ रहा है।

बिजली आते ही सभी की आस बंध जाती है कि पानी कभी भी आ सकता है। लोग एक-दूसरे से पूछते हैं, पानी आ रहा है क्या। वहीं अनुपमा सरीन का कहना है कि पानी आपूर्ति कब होती है, इसकी जांच होनी चाहिए। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि अब बहुत हो चुका। स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे बाल्टी लेकर सड़क पर उतरने को बाध्य होंगी।

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  • Web Title:पॉश कालोनियों में पानी के लिए रतजगा कर रहे लोग