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सरकारी स्कूल के शिक्षकों की जवाबदेही तय होगीः शिक्षा मंत्री

माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र ने कहा है कि राज्य सरकार शिक्षकों के वेतन पर सालाना 27 सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में नतीजे अच्छे नहीं आ रहे हैं। कुल बजट का 66 फीसदी धन का अपव्यय हो रहा है। यह चिन्ताजनक बात है। अब वक्त आ गया है कि शिक्षकों की जवाबदेही तय की जाए।

श्री मिश्रा शनिवार को यहाँ माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता-चुनौतियाँ व समाधान विषय पर आयोजित एक सेमिनार में बोल रहे थे। सेमिनार का आयोजन माध्यमिक शिक्षा विभाग और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। सेमिनार में आईआईटी व आईआईएम के विशेषज्ञों के अलावा डा. एलपी पांडे, प्रो. आरजे सिंह, अशोक गांगुली, उमेश सी वशिष्ठ जैसे शिक्षाविद शामिल थे।

संचालन सर्वेन्द्र विक्रम सिंह ने किया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि माध्यमिक शिक्षा में सुधार का दौर शुरू हुआ है। लेकिन अभी बहुत सारी चीजें ठीक करनी हैं। उन्होंने कहा कि किडनैपिंग व डकैतियाँ करने वाले लोगों ने स्कूलों में पैसा लगाना शुरू कर दिया है। राज्य में ग्यारह हजर से ज्यादा प्राइवेट स्कूल हैं। इन स्कूलों के नतीजे भी अच्छे आ रहे हैं। सरकारी स्कूलों में छठा वेतन आयोग लागू कर दिया गया।

शिक्षक मोटी तनख्वाहें पा रहे हैं।  इसके बावजूद सरकारी स्कूलों के नतीजे निराशाजनक हैं। ऐसा नहीं है सरकारी स्कूलों में बच्चे पढ़ना नहीं चाहते। हम उन्हें स्कूलों में क्या दे रहे हैं? शिक्षकों का उत्तरदायित्व तय होना चाहिए।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक कृष्ण मोहन त्रिपाठी ने भी शिक्षकों के परफारमेंस अपरेजल और उनकी जवाबदेही की बात उठाई। आईआईएम की प्रो. अर्चना शुक्ला ने ब्रिटिश काउंसिल के एक सर्वे के आधार पर बताया कि बच्चे शिक्षक से क्या चाहते हैं।

छात्रों को जो चाहिए उन्हें वह स्कूलों में नहीं मिल रहा है। शिक्षाविद् अशोक गांगुली ने कहा कि आज के युग में ज्ञान का विस्फोट हो रहा है। ऐसे में बहुत सतर्कता की जरूरत है। बच्चों पर से थ्री-सी के दबाव को खत्म करना होगा। ये थ्री-सी हैं- कंपलशन यानी अनिवार्यता, कंपैरिजन यानी तुलना और कंपटीशन यानी प्रतियोगिता। उन्होंने नई शिक्षा प्रणाली पर जोर दिया।

यूपी बोर्ड पाठ्यचर्या समिति के संयोजक डा. लक्ष्मी प्रसाद पांडे ने कहा कि परीक्षा के नतीजे गुणवत्ता के मानक नहीं हो सकते। शिक्षकों को समय-समय पर ट्रेनिंग की जरूरत है। आज डायट बीटीसी की भर्ती की मशीन बन गए हैं। उनका सारा ध्यान नए शिक्षकों की भर्ती व उनकी मेरिट पर है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के अपरेजल के बिना उन्हें प्रमोशन न दिया जाए।

उन्होंने मंत्री से शिक्षकों की सेवा शर्तो में बदलाव की सिफारिश की। श्री पाण्डेय ने कहा कि यह चुनौतीपूर्ण काम है पर इसे करना होगा क्योंकि कोई भी नया प्रयोग या सुधार योग्य शिक्षकों के बगैर संभव नहीं है। प्रो. उमेश सी वशिष्ठ ने कहा कि पाठ्यपुस्तक भगवान नहीं है।

शिक्षा केवल तय सेलेबस के इर्द-गिर्द नहीं होनी चाहिए। पढ़ाई में सीखने व सीखाने का आनंद गायब हो रहा है। प्रो. वशिष्ठ ने शिक्षा में गिरावट के लिए प्रशासनिक अधिकारियों व नीति निर्माताओं को जिम्मेदार ठहराया।

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