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पहाड़ पर पोखरियाल

पहाड़ पर पोखरियाल

रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ हिमालयी राज्य उत्तराखंड के नये मुख्यमंत्री बनाये गये हैं। उप नाम से ‘निशंक’ हैं। शंका से परे। दृढ़। विश्वासी। लेकिन जिन हालातों में उनके सिर पर मुख्यमंत्री का ताज रखा गया है, वह कांटों से भरा है। सूबे में बगावत के बाद भाजपा आलाकमान से मिले तोहफे के फूल कितने दिन महकेंगे, यह समय बताएगा। बगावत थमी नहीं है। चिंगारी अंदर-अंदर सुलग रही है। मिलनसारिता यूं उनके व्यक्तित्व का हिस्सा है।

इस कला से वे बगावत पर काबू पा भी सकते हैं। वाणी में कोमलता और संयम है। कवि जो ठहरे। राजनीति में सीधे-सीधे तो वे आये नहीं। संघ परिवार की सीढ़ी ने उन्हें राजनीति में पहुंचाया। छात्र जीवन में ही निशंक संघ से जुड़ गये थे। प्रचारक मार्का शख्सियत के साथ। उत्तराखंड के पौड़ी जिले में पट्टी घुड़दौड़स्यूं क्षेत्र के पिनानी गांव में 15 अगस्त 1958 को जन्मे निशंक स्नातकोत्तर डिग्री हासिल करने के बाद पत्रकारिता में आ गये। पोखरियाल मंत्री होने के बावजूद अभी भी अपने अखबार ‘सीमांत वार्ता’  (सांध्य दैनिक) के प्रधान सम्पादक के रूप में राज्य के मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं।

पत्रकारिता उनका मुख्य पेशा नहीं रहा। मास्टरी उनकी मुख्य रोजी-रोटी रही। संघ से संबद्ध संस्था द्वारा संचालित शिशु मंदिर के प्राचार्य बने। जब भाजपा ने संयुक्त उत्तर प्रदेश में उत्तरांचल की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया, तो राजनीति का दरवाज निशंक के लिये खुल गया। संघ के निर्देश पर शिशु मंदिर से निशंक को मुक्त कर चुनाव लड़वाया गया। वह पहली बार 1991 में कर्णप्रयाग विधानसभा से कांग्रेस के दिग्गज डॉ. शिवानंद नौटियाल को हराकर उत्तर प्रदेश विधानसभा में पहुंचे।

उत्तर प्रदेश सरकार में विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके डॉ. नौटियाल को 22 साल में पहली बार ‘निशंक’ ने ही इस सीट पर तब उन्हें पटखनी दी थी। इस सीट से ‘निशंक’ उसके बाद वर्ष1993 तथा वर्ष1996 में हुए चुनाव में लगातार जीते। वर्ष1997 में उत्तर प्रदेश सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर उत्तरांचल विकास विभाग का जिम्मा सौंपा गया। इसके अगले साल ही उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में संस्कृति और धर्मस्व मंत्री बनाया गया। उत्तर प्रदेश से अलग कर उत्तरांचल राज्य के गठन के बाद निशंक को राज्य के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनाया गया और वित्त तथा शिक्षा सहित 12 मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी गई।

वर्ष 2002 में उत्तराखण्ड में जब पहली बार चुनाव हुए तो पोखरियाल थलीसैंण से चुनाव हार गये। लेकिन वर्ष 2007 में उन्होंने यह कमी पूरी कर ली और चुनाव जीत कर सरकार में फिर से कैबिनेट मंत्री बने। मुख्यमंत्री बनने से पहले वे भुवनचंद खंडूड़ी की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में काम कर रहे थे। जनरल खंडूड़ी शासन की सबसे अहम योजना यानी 108 मेडिकल सेवा उन्हीं के मंत्रित्व काल में उत्तराखंड के दूर-दराज के गांवों के लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा देने के लिए शुरू की गई।

इस योजना से खंडूड़ी सरकार  पिछड़े व दुर्गम इलाकों में काफी लोकप्रिय हुई, क्योंकि आम व बेसहारा लोगों के लिए यह योजना वरदान साबित हुई। यह आवश्यक सुविधाओं से लैस चिकित्सा वाहन है, जिसे बुलाने के लिए 108 नंबर पर डायल कर पीड़ित को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाती है। निशंक एक अच्छे कवि और उपन्यासकार भी हैं। उन्होंने कई पुस्तकें लिखी हैं और इसके लिए उन्हें पुरस्कार भी मिले हैं

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