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नेहरा ने निकाली वापसी की राह

नेहरा ने निकाली वापसी की राह

मुश्किल वक्त में धैर्य और आत्मविश्वास के साथ गेंदबाजी करके अपने कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी का भरोसा और प्रशंसकों का दिल जीतने वाले तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे मैच में न सिर्फ अपने दमखम का मुजहिरा किया बल्कि चयनकर्ताओं के फैसले को भी सही साबित किया।

वेस्टइंडीज को सीरीज के इस मुकाबले में 12 गेंद पर 21 रन की दरकार थी तब कप्तान ने अपने किसी आजमाए हुए गेंदबाज के बजाय लगभग चार साल बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी कर रहे नेहरा पर विश्वास दिखाया।
 पहले भी अग्निपरीक्षा लेने वाले कई मौकों पर सधी हुई गेंदबाजी कर चुके नेहरा ने धोनी के भरोसे पर खरा उतरते हुए ओवर की पहली ही गेंद पर खतरनाक कैरेबियाई बल्लेबाज दिनेश रामदीन को हरभजन सिंह के हाथों कैच आउट कराकर भारत की जीत की इबारत लिख दी। नेहरा ने इस मैच में कुल 49 रन देकर तीन अहम विकेट लिये। उन्होंने करीब पांच साल पहले पाकिस्तान के खिलाफ हुए उस मैच की याद ताज करा दी जब इस चिर-प्रतिद्वंद्वी को आखिरी ओवर में जीत के लिये नौ रन की जरूरत थी और क्रीज पर मोइन खान जैसा अनुभवी तथा आक्रामक बल्लेबाज था। नेहरा ने धैर्य और दबाव में जबर्दस्त जीवट दिखाते हुए वह ओवर फेंका और सिर्फ तीन रन देने के साथ-साथ मोइन खान को आउट भी किया। भारत वह मैच पांच रन से जीता था।

अपने कैरियर में ज्यादातर वक्त चोटों से परेशान रहे नेहरा ने इससे पहले अपना आखिरी वनडे मैच जिम्बाब्वे में 6 सितम्बर, 2005 को न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। टेस्ट क्रिकेट से तो वह पिछले करीब पांच साल से महरूम हैं। भारतीय तेज गेंदबाजी के फलक पर नेहरा का नाम इस वक्त टीम इंडिया के सबसे बेहतरीन तेज गेंदबाज माने जाने वाले जहीर खान के साथ उभरा था। नेहरा को विलक्षण प्रतिभा वाला गेंदबाज माना जता था लेकिन लगातार चोटिल रहने और उसकी वजह से प्रदर्शन के स्तर में गिरावट आने के कारण वह फिर भारतीय टीम में जगह नहीं बना सके थे।

बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों इरफान पठान और रुद्र प्रताप सिंह के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उद्भव के बाद नेहरा के लिये भारतीय टीम में वापसी के रास्ते और तंग हो गए। अतीत में झांके तो ऐसे न जाने कितने गेंदबाजों के उदाहरण मिल जएंगे जो शुरुआत में उम्मीदें जगाने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्षितिज से गायब हो गए और फिर कभी राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं बना सके। हालांकि नेहरा ने नाउम्मीदी के भंवर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय रनभूमि में अच्छा प्रदर्शन करके अपनी क्षमता एक बार फिर सिद्ध कर दी। भारतीय टीम से बाहर होने के बाद नेहरा ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) और घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन किया जिससे प्रभावित होकर चयनकर्ताओं ने अनुभवी गेंदबाज जहीर खान के अनफिट होने की वजह से नेहरा को टीम में शामिल करके उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी का मौका दिया।

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