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समलैंगिकता अपराध नहीं, कानून में होगा सुधार

समलैंगिकता अपराध नहीं, कानून में होगा सुधार

केंद्र भारतीय दंड संहिता की उस विवादास्पद धारा को खत्म करने पर विचार कर रहा है जिसमें समलैंगिकता को आपराधिक कृत्य माना गया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को खत्म करने पर आम सहमति बनाने के लिए केंद्र जल्द ही एक बैठक करेगा।

सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय गहमंत्री पी चिदंबरम की अध्यक्षता वाली बैठक में भारतीय दंड संहिता की विवादास्पद धारा को खत्म किए जाने पर विचार किया जाएगा जो समान लिंग के लोगों के बीच सेक्स संबंधों को प्रतिबंधित करती है।

चिदंबरम और कानून मंत्री वीरप्पा मोइली के बारे में माना जाता है कि वे धारा 377 को खत्म किए जाने के पक्ष में हैं, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद के जवाब की प्रतीक्षा की जा रही है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गृह और स्वास्थ्य मंत्रियों से मुद्दे पर मतभेदों के समाधान और दिल्ली हाई कोर्ट को विस्तृत जवाब देने को कहा था जो काननू के तहत गिरफ्तारियों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

पूर्व गहमंत्री शिवराज पाटिल और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदास की अदालत के समक्ष इस मुद्दे पर अलग अलग राय थी। मामले को गंभीर करार देते हुए हाई कोर्ट ने मामले को जल्द से जल्द सुलझाने के निर्देश दिए हैं।

समलैंगिक काफी समय से धारा 377 को खत्म किए जाने की मांग करते रहे हैं, तो वहीं समाज में उनकी इस मांग का विरोध भी होता रहा है।

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  • Web Title:समलैंगिकता अपराध नहीं, कानून में होगा सुधार