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आ गई टैक्स रिटर्न दाखिल करने की घड़ी

टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख है 31 जुलाई। यही सही वक्त है अपने रिटर्न से जुड़े कुछ जरूरी पहलुओं को दुरुस्त कर उन्हें सही अमली जमा पहनाने का। अगर आप युवा है और पहली बार रिटर्न फाइल करने जा रहे हैं, तो यहां प्रतीक अग्रवाल पेश कर रहे हैं कुछ कारगर सूत्र.

सही पैन नंबर लिखें

यह कई बार होता है, लोग लापरवाही कर जाते हैं। लेकिन इनकम टैक्स रिटर्न को लेकर इस तरह की चूक भारी पड़ सकती है। अपने आईटीआर फॉर्म पर पैन नंबर का सही होना सुनिश्चित कर लें। यह टैक्स चालान पर भी सही लिखा जाना चाहिए। यदि यह गलत हो गया तो आपको भुगतान किए गए टैक्स का किसी प्रकार का क्रेडिट नहीं मिलेगा। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि पैन नंबर सही न लिखने या न लिखने पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

काल करे सो आज कर

रिटर्न फाइल करने का काम जल्दी करें। इस मामले में अंतिम तिथि का इंतजार करना ठीक नहीं होता। याद रखें, रिटर्न फाइल करने में देर करने से आपको किसी तरह का कोई फायदा नहीं होने जा रहा। यदि आप समय पर सही मानसिक स्थिति में बिना हड़बड़ी रिटर्न फाइल कर देते हैं तो आप अंतिम दिनों में लगने वाली लाइनों से बच सकेंगे। यदि आपकी टैक्स की कोई देनदारी बनती है तो आप जल्दी रिटर्न फाइल कर अपने ऊपर बकाया देनदारी पर लगने वाले ब्याज में कमी कर सकते हैं। और यदि आप ऑनलाइन रूट का इस्तेमाल करने वाले हैं तो आखिरी दिनों में टैक्स डिपार्टमेंट का सर्वर भी जाम हो सकता है जिससे आपकी पूरी योजना अधर में लटक सकती है।

टीडीएस कटा हो तो भी रिटर्न भरनी जरूरी

ज्यादातर लोग इस भ्रम में रहते हैं कि एम्प्लायर ने इनकम पर टीडीएस (स्रोत पर टैक्स) काट तो लिया है अब हमें रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं। लेकिन ऐसा है नहीं। यदि आपकी सभी स्रोतों से होने वाली सकल आय छूट सीमा से ऊपर है तो आपको रिटर्न अवश्य फाइल करनी होगी।

सभी टीडीएस सर्टिफिकेट हासिल करें

यदि आप वेतनभोगी हैं तो आपको अपने नियोक्ता से फॉर्म 16 के रूप में टीडीएस सर्टिफिकेट हासिल करना होगा। लेकिन अगर आप किराए, ब्याज, प्रोफेशनल, कंसल्टिंग रिसीट्स या अनुबंध राशि या कमीशन प्राप्त कर रहे हैं तो आपको फार्म 16ए में टीडीएस सर्टिफिकेट हासिल करना होगा।

सभी स्रोतों से आय घोषित करें

टैक्स रिटर्न में आमतौर पर यह चूक हो जाती है कि लोग अपने बचत खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट या अन्य लघु बचत खातों पर मिलने वाले ब्याज को रिटर्न में दिखाना भूल जाते हैं। सभी प्रकार से होने वाली पूरी आय को रिटर्न में दिखाना जरूरी होता है। टैक्स प्रोसेस के कंप्यूटरीकरण और अधिकांश ट्रांजेक्शंस में पैन नंबर के अनिवार्य कर दिए जाने के बाद से टैक्स डिपार्टमेंट आपके पैसे की आवक-जावक को आसानी से देख सकता है। ध्यान रहे टैक्स अधिकारी की शिकंजे में न पड़ जाएं। इसलिए सभी प्रकार की आय का सही ब्योरा दें।

रिटर्न ऑनलाइन फाइल करें

भारत में टैक्स भरने की प्रकिया काफी हद तक साधारण है और पिछले कुछ वर्षो से टैक्स विभाग ने रिटर्न फार्म को आसान और तार्किक बनाया है। इसे भरने के लिए हमेशा सीए की जरूरत नहीं। आप इसे खुद भर सकते हैं या फिर मौजूदा कई ऑनलाइन विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि इलैक्ट्रॉनिक रिटर्न फाइल करने के लिए डिजिटल हस्ताक्षर होने जरूरी हैं।

जरूरी हो तो सेल्फ असेसमेंट टैक्स भरें

यदि टैक्स की देयता अब तक काटी गई या भुगतान की गई टैक्स की मात्रा से ज्यादा बनती है तो इस टैक्स देयता का भुगतान करना होगा। इसे सेल्फ असेसमेंट टैक्स कहते हैं। सेल्फ असेसमेंट टैक्स के लिए इनकम टैक्स चालान नंबर 280 का प्रयोग करना होगा। आजकल इसका भुगतान ऑनलाइन भी किया जा सकता है।

रिफंड और आपकी बैंक संबंधी जानकारी

यदि आपकी टैक्स की देनदारी नहीं बनती और आपकी आय में से ज्यादा टैक्स काट लिया गया है तो आपको रिटर्न फाइल करनी चाहिए। यदि आप टैक्स रिफंड के लिए रिटर्न फाइल कर रहे हैं तो यह सुनिश्चित करें कि उसमें आप अपने बैंक संबंधी विवरण सही भरें।

यह इसलिए जरूरी है क्योंकि टैक्स रिफंड सीधे आपके खाते में जाएगा। कृपया ध्यान दें कि आपकी रिटर्न में एकाउंट का टाइप- बचत या चालू खाता, एकाउंट नंबर तथा आपकी ब्रांच का एमआईसीआर नंबर (चैक के निचले भाग में लिखा नौ अंकीय संख्या) अवश्य लिखा हो।

कर कटौती से जुड़े सारे विवरण लिखें

टीडीएस सर्टिफिकेट, एडवांस टैक्स चालान तथा सेल्फ असेसमेंट टैक्स चालान से ही आपकी आईटीआर पर
लिखे डाटा की सत्यता और प्रामाणिकता के आधार पर ही आपको टैक्स क्रेडिट मिल सकता है।

यह सुनिश्चित करें नियोक्ता या टैक्स काटने वाले का टैन नंबर (टैक्स डिडक्शन एंड कलेक्शन एकाउंट नंबर), काटी गई राशि तथा कटौती की तिथि स्पष्ट रूप से लिखी गई हो। सेल्फ असेसमेंट या एडवांस टैक्स चालान के मामले में नाम, ब्रांच का पता तथा बैंक का बीएसआर कोड, जहां टैक्स जमा कराया गया है, चालान का सीरियल नंबर, राशि और जमा कराने की तिथि स्पष्ट रूप से लिखी जाए।

(लेखक आईट्रस्ट पानेंशियल एडवाइजर्स में टैक्स एडवाइजरी सर्विस के प्रमुख हैं।)

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