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मक्खी मारने का वक्त

मंदी तो सचमुच बहुत है। अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियां दीवालिया हो गयीं। बैंक दीवालिया हो गए। अब उनके कर्मचारी तो बेचारे मक्खी ही मार रहे होंगे न। इस मंदी में कहां काम मिला होगा? मंदी में सिर्फ दुकानदार ही मक्खी थोड़े ही मारते हैं। सिर्फ कारोबारी और व्यापारवाले ही मक्खी थोड़े मारते हैं। मजदूरों और कर्मचारियों को भी मालिक लोग कह देते हैं कि अब आप लोग थोड़े दिन बस मक्खियां मारिए।

पर अभी ऐसी नौबत तो निश्चय ही नहीं आयी है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा ही मक्खी मारने लगें। वैसे मंदी के इस जमाने में ओबामा को मक्खी मारते देखकर खुशी भी हुई, वरना कहते हैं कि तीस के जमाने में जब महामंदी आयी थी तो उसने तो हिटलर को मानुष मारने का ही मौका मुहैया करा दिया था। ये तो बेचारे मक्खी ही मार रहे हैं। इससे यह भी साबित होता है कि मंदी अभी मानुष मारने जैसी विकट नहीं हुयी है, मक्खी मारने के स्तर पर ही पहुंची है। वैसे भी उनके पूर्ववर्ती बुश साहब को जहां भी मौका मिल जाता था, वे पंहुच जाते थे ठांय-ठांय करने। पर बिल क्िलंटन साहब की छवि ऐसी खूंखार नहीं थी। वे एकदम प्रेमी जीव थे। इसीलिए उन्हें लेडीकिलर माना जाता था। इसीलिए हिलेरी ने उन्हें माफ भी कर दिया था। अगर मक्खी मार रहे होते तो शायद न करती। पर अब ओबामा तो मक्खी मार रहे हैं। वैसे भी जिस राह पर वे चल रहे हैं, उस पर चलकर मक्खी मारने के अलावा और बचेगा भी क्या। वे इराक से सेना हटाना चाहते हैं। वे अफगानिस्तान समस्या का हल चाहते हैं। वे मुस्लिम दुनिया से मेल-मिलाप चाहते हैं। वे क्यूबा के साथ बात करना चाहते हैं, कारोबार करना चाहते हैं। अगर यह सब कर लिया तो उनके पास मक्िखयां मारने के अलावा बचेगा भी क्या? अमेरिकी राष्ट्रपति जब तक दिन में पांच मुल्कों को धमकाएगा नहीं। अपने फौज-फांटे का डर नहीं दिखाएगा, बमबाजी नहीं करेगा, रंगबाजी नहीं करेगा, तो मक्खियां ही मारेगा और क्या करेगा?

ऐसे में समस्या यह है कि मंदी के चलते अमेरिकी कंपनियों के मजदूर और कर्मचारी तो मक्खियां मार ही रहे हैं, राष्ट्रपति को भी मक्खी मारते सारी दुनिया ने देख ही लिया टेलीविजन पर। ऐसे में सीआईए क्या करेगी? सीआईए को आमतौर पर तीस मार खां माना जाता है। पर उसे भी अगर मक्खियां ही मारनी पड़ी तो कौन उसे तीस मार खां मानेगा? पेटावाले पशुप्रेमी चाहे अमेरिकी राष्ट्रपति के मक्खी मारने से कितने ही नाराज हों। पर अगर अमेरिकियों के हाथों मरने से इंसान बचा रहता है तो मक्खी मारना अफोर्ड किया जा सकता है।

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