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अमृतम् जलम् कार्यक्रम

विश्व पर्यावरण का गिरता स्तर अब अपने कई रूपों में मानव सृष्टि के सामने अपनी दस्तक देने लगा है। भू-जल स्तर में सतत् गिरावट, सूखती नदियां, पिघलते ग्लेशियर, बढ़ता प्रदूषण, समुद्री तूफान और चक्रवात घोर खतरे का संकेत हैं। यदि हम अब भी नहीं चेते तो आने वाले समय में सम्पूर्ण सृष्टि का विनाश अवश्यंभावी है। अधिकाधिक वृक्षारोपण, नदियों को प्रदूषण मुक्त करने, पुराने कुएं व बावड़ियों की सफाई करवाने के ‘अमृतम्-जलम्’ जैसे कार्यक्रम देश भर में चलाएं जाने चाहिए। अतः जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार को चाहिए कि शहरों और गांवों में भी इन बातों को ध्यान में रख पानी उपलब्ध कराएं।

युधिष्ठिर लाल कक्कड़, गुड़गांव


राजनीतिक पार्टी में अनुशासन

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह कहते हैं या कहिए धमकी देते हैं कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जएगी। पार्टी की आलोचना पार्टी के अंदर के मंच पर ही होनी चाहिए। बाहर नहीं। सही है। पार्टी के संगठन और एकता के लिए यह आवश्यक है। परंतु इसकी एक अनिवार्य शर्त है।

वह यह कि पार्टी के अंदर राष्ट्रीय, प्रादेशिक, जिला और मंडल स्तरों पर ऐसे मंच होने चाहिए। इनकी नियमित रूप में बैठकें हों। कम से कम तीन महीने में एक बार तो अवश्य। उनमें सभी सदस्यों को पार्टी के सभी मामलों की समीक्षा का अधिकार हो।

विशेषकर पार्टी के सभी स्तर के अधिकारियों एवं गणमान्य सदस्यों की जवाबदेही हो। जिस पार्टी में ऐसे नियमित रूप से सक्रिय और जीवन्त मंच नहीं हैं, उसमें वे कार्यकर्त्ता जिनके साथ अन्याय हुआ है, या तो पार्टी छोड़ देंगे, या बाहर उसकी आलोचना करेंगे, या समय आने पर निष्क्रिय हो जएंगे या भितरघात करेंगे। इसका उत्तरदायित्व पार्टी के नेताओं और संगठन कर्त्ताओं पर पहले आएगा। उन कार्यकत्र्ताओं पर बाद में।

क्या भाजपा में ऐसे जीवंत मंच बनाए गए हैं? यदि नहीं हैं, तो बनाए जाएंगे?

डॉ. रमेश चन्द्र नागपाल
भव प्रगति मंगलम, डी-2239,
इंदिरा नगर, लखनऊ

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