class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नीलेकणी का परिचय

देश के हर नागरिक के लिए एक राष्ट्रीय पहचान पत्र बने, यह सोच बहुत नई नहीं है। भारतीय जनता पार्टी इसे चुनावी मुद्दा बनाती रही है लेकिन कांग्रेस ने इसके लिए बनाई गई संस्था में इनफोसिस के पूर्व सीईओ नंदन नीलेकणी को सर्वेसर्वा बनाकर यह बता दिया है कि उसके लिए इस मामले की प्राथमिकता कितनी ज्यादा है। सरकार अगर परंपरागत ढंग से चलती तो यह व्यवस्था किसी बुझे हुए राजनीतिज्ञ या किसी रिटायर्ड नौकरशाह के हवाले की जा सकती थी। लेकिन नीलेकणी जैसे प्रतिष्ठित प्रोफेशनल को इसमें लगाने का अर्थ है कि सरकार अब कामकाज के तौर-तरीके बदलने को तैयार है। देश के हर व्यस्क को कंप्यूटराइज्‍ड पहचान-पत्र देने का मामले के कई तकनीकी पक्ष भी हैं और नीलेकणी सूचना तकनीक की दुनिया का एक जाना पहचाना नाम है, इसलिए भी उनके चुनाव का स्वागत किया जा रहा है। लेकिन यह शायद ज्यादा बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात यह है कि नीलेकणी अपने साथ काम को पूरी कुशलता से और ठीक समय पर करने की वह आधुनिक संस्कृति भी लाएंगे, जिसकी सरकारी क्षेत्र को काफी जरूरत है। कुछ वैसे ही जैसे दिल्ली मेट्रो रेल कॉपरेरेशन में श्रीधरण को लाकर पूरी परियोजना को एक उदाहरण बना दिया गया था। नीलेकणी नाम देश के उन बड़े प्रोफेशनल्स में लिया जाता है, जिनकी उद्यमिता ने एक ही पीढ़ी में भारत को सूचना तकनीक की दुनिया का सुपर पावर बना दिया। इस पीढ़ी के लोग अब जब अपने लक्ष्य हासिल करने के बाद बड़े सामाजिक उद्देश्यों से जुड़ने की इच्छा दिखा रहे हैं तो उनकी प्रतिभा और अनुभव का लाभ उठाने की व्यवस्था जरूर की जानी चाहिए।

पिछले कुछ साल में हमने ऐसी एक बड़ी परियोजना मतदाता पहचान-पत्र के रूप में देखी है। इसकी तमाम खामियां और सीमाएं भी हमारे सामने हैं। देश के उन गरीबों, दलितों और आदिवासियों को पहचान-पत्र देना और उन्हें उसका महत्व समझाना और उनके लिए उपयोगी बनाना कोई हंसी खेल नहीं है, जिनके पास न रहने का ठिकाना है और न दो वक्त पेट भरने का जुगाड़। यह भी जरूरी है कि विदेशों से मिलने वाली सॉफ्टवेयर परियोजनाओं में दक्षता हासिल करने और नाम कमाने वाली प्रतिभा को देश की इस जमीनी हकीकत से रूबरू होने का मौका दिया जाए। पहचानपत्र की जटिलताएं और भी हैं। कहीं इसका जिक्र बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ने के मकसद से होता रहा है तो कहीं सीमावर्ती क्षेत्र में धरपकड़ के लिए। इसलिए यह व्यवस्था भी जरूरी होगी कि कहीं यह पहचान-पत्र मानवाधिकार हनन का जरिया न बन जाए।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:नीलेकणी का परिचय